Tuesday, June 30, 2026

भगवान महावीर की वाणी सबका कल्याण करने वाली: आचार्य विशद सागर

सिद्धार्थ नगर जैन मंदिर का रजत जयंती महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न

शाबाश इंडिया | जयपुर।

श्री दिगंबर जैन मंदिर महावीर स्वामी (खंडाकान), सिद्धार्थ नगर जयपुर का रजत जयंती महोत्सव क्षमा मूर्ति आचार्य विशद सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और “महावीर स्वामी की जय” के जयकारों से परिसर गूंज उठा।

मंदिर अध्यक्ष महावीर रावकां ने बताया कि प्रातः 8:30 बजे गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ, जिसका शुभारंभ भगवान महावीर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान जैन युवा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जैन, राजस्थान जैन सभा जयपुर के उपाध्यक्ष विनोद जैन (कोटखावदा), महामंत्री मनीष बैद, महावीर रावकां, मनीष चौधरी, महावीर प्रसाद जैन (पवालियां अतिशय क्षेत्र), वरुण पथ से राजेन्द्र सोनी, एसएफएस से विजय बोहरा, चित्रकूट कॉलोनी से दीपक पहाडियाँ सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

धर्मसभा में आचार्य विशद सागर महाराज ने भगवान महावीर के जीवन चरित्र और साधना पर प्रकाश डालते हुए उनके पांच नामों—वीर, अतिवीर, वर्धमान, सन्मति और महावीर—की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि धर्म का सच्चा स्वरूप भगवान महावीर की दिव्य वाणी में निहित है, जो आज भी जिनवाणी के रूप में विश्वभर में धर्म प्रभावना कर रही है।

इससे पूर्व सिद्धार्थ नगर गौरव मुनि विशाल सागर ने बताया कि 25 वर्ष पूर्व 30 जून 2002 को इस जिनालय की स्थापना हुई थी। भगवान महावीर की मनोहारी प्रतिमा की स्थापना के बाद क्षेत्र में आध्यात्मिक एवं सामाजिक विकास को नई दिशा मिली।

उन्होंने कहा कि धर्म प्रभावना के माध्यम से जीवन में पुण्य अर्जित करना ही सच्चा उद्देश्य है। इस अवसर पर समाज श्रेष्ठी विजय पहाडियाँ परिवार द्वारा मुनि विशाल सागर महाराज को नवीन पिच्छीका भेंट की गई, जबकि पुरानी पिच्छीका प्राप्त करने का सौभाग्य भी इसी परिवार को मिला।

कार्यक्रम में मनीष चौधरी के निर्देशन में आचार्य श्री की संगीतमय पूजा एवं महाअर्घ्य समर्पण किया गया। मंच संचालन राजकुमार जैन ने किया।

मंत्री कैलाश भौंसा ने बताया कि प्रातः 6:30 बजे अभिषेक की प्रारंभिक क्रियाएं संपन्न हुईं। इसके बाद 108 कलशों से 108 इंद्रों द्वारा महामस्तकाभिषेक एवं मंत्रोच्चार के साथ महाशांति धारा की गई। सामूहिक संगीतमय पूजा में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से सहभागिता निभाई, वहीं इंद्र-इंद्राणियों ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किए।

सायंकाल 7:00 बजे आचार्य विद्यासागर महामुनिराज के मुनि दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में 36 दीपकों द्वारा महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें आचार्य परमेष्ठी के 36 मूल गुणों का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। इससे पूर्व भगवान महावीर की 108 दीपों से भव्य आरती की गई।

रात्रि में भक्ति संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में पारस बाकलीवाल, कमलकांत गंगवाल (कोषाध्यक्ष), अंकित जैन, रूपल जैन, संजय जैन, निर्मल तेरापंथी, रमेश गंगवाल, नरेश जैन, कमल छाबड़ा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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