स्मरण दिवस : 19 दिसंबर
स्वर्गीय श्री मोहनलाल जी गंगवाल
(साड़ी घर, पचार वाले)
बड़े बाबा कुण्डलपुर के परम भक्त, आदरणीय पापाजी स्वर्गीय श्री मोहनलाल जी गंगवाल (साड़ी घर, पचार वाले) से आज हमारा 24 वर्षों का वियोग हो गया है, लेकिन आज भी ऐसा ही लगता है कि वे हमारे साथ ही हैं। एक पल के लिए भी हम उन्हें भुला नहीं पाए हैं।
उन्होंने कभी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की किंचित भी कोशिश नहीं की, परंतु वे हमारे जीवन में शून्यता की अथाह और गहरी छाप छोड़ गए। उन्होंने न किसी की चिंता की, न धन की और न ही धनवान की परवाह की। उन्होंने जीवन भर ज्ञान बटोरा और वही ज्ञान अपनी वाणी तथा अपने आचरण के माध्यम से बाँटते रहे।
वे सरलता, सहजता, शांति, विनम्रता और अध्यात्म की जीती-जागती प्रतिमूर्ति थे। उनका पूरा जीवन ही सहज था। उनके जीवन में न व्यंग्य था, न कटाक्ष, न किसी से कोई अपेक्षा और न ही किसी के प्रति कोई द्वेष।
उन्होंने किसी बात की चिंता नहीं की, वस्तु-व्यवस्था से कोई विरोध नहीं रखा और न ही कोई आकांक्षा पाली। वे जीवन भर बस बहते रहे। मैंने 31 वर्षों तक उन्हें चौबीसों घंटे देखा है—वे साक्षी भाव और सहज जीवन की जीती-जागती मिसाल थे। उन्होंने अपनी मीठी वाणी और भजनों के रस से सभी को आनंदित किया। अब बस उनकी स्मृतियाँ ही शेष रह गई हैं।
पापा तो चले गए हैं, और हम भी कोई अमर होकर नहीं आए हैं—देर-सवेर हमें भी जाना ही है। आइए, आज से हम अपनी जीत-हार, सफलता-असफलता की परिभाषा बदल लें और यदि बहुत नहीं तो कम से कम चार कदम उनके पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करने का संकल्प लें। तभी हम अपने जीवन को सार्थक कर पाएँगे। पापा जैसा बन पाना इस जीवन में असंभव है, परंतु उनके आशीर्वाद से अपनी और दूसरों की ज़िंदगी को बेहतर बना सकें—यही हमारा प्रयास हो।
श्रद्धावनत
समता – राकेश गोदिका


