माता मरुदेवी ने देखे सोलह सपने — आज बताया जाएगा सपनों का फल
अपने आप का मंगल करना है तो मन को मंगल बनाओ — मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज
आज निकलेगी जन्म कल्याणक महोत्सव पर विशाल शोभायात्रा — विजय धुर्रा
पडूकशिला पर इन्द्रों द्वारा होगा भगवान का जन्माभिषेक
अशोक नगर — नगर के मंडी प्रांगण में निर्यापकाचार्य मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीपभाइया के निर्देशन में चल रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में बीती रात सौधर्म इन्द्र के दरबार में समाचार पहुँचा कि मध्यलोक के भरत क्षेत्र, आर्यखंड की भारतीय वसुंधरा पर अयोध्या नगरी में महाराजा नाभि के घर माता मरुदेवी के राजमहल में तीर्थंकर कुमार का जन्म हुआ है। इसके साथ ही धनकुबेर को अयोध्या नगरी को सर्व सुविधायुक्त बनाने का संदेश दिया गया।
धर्मात्मा से ही होती है धर्म की पहचान
इस अवसर पर आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थचक्रवर्ती मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि किसी भी धर्म की पहचान धर्मात्मा से होती है। धर्मात्मा को देखकर ही धर्म का परिचय मिलता है। त्याग का महत्व है, क्रिया का महत्व है। हम अपना मन गंदा नहीं करेंगे और न दूसरों का मन गंदा करेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रातः काल का ब्रह्ममुहूर्त अत्यंत पवित्र होता है — प्रातः 4 बजे से लेकर सूर्योदय तक के समय को प्रत्यूष काल कहा जाता है। यह बहुत शुभ मुहूर्त होता है। इस समय जो भी कार्य किया जाता है, वह अत्यंत फलदायी होता है। ब्रह्ममुहूर्त के प्रथम पहर में भरत चक्रवर्ती भी ऐसे ही पवित्र वातावरण में रहते थे, जिससे मन निर्मल बना रहे।
उन्होंने कहा— “मंगलाचरण करो। यदि तुमने मंगलाचरण कर लिया तो कोई गलत विचार आ भी जाए, तो भी किसी दूसरे को उसका बुरा नहीं लगेगा।”
कल निकलेगी भव्य शोभायात्रा
जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीपभाइया के निर्देशन में कल भव्य जन्माभिषेक महोत्सव की विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी।
यह शोभायात्रा अयोध्या नगरी से प्रारंभ होकर—
एफओवी पुल, गांधी पार्क, पुराना बाजार, प्रोसेसर रोड, सुराणा पार्क, इन्द्र पार्क, सुभाष गंज, विद्यासागर दार, भगवान महावीर मार्ग, स्टेशन रोड, गांधी पार्क होते हुए पुनः अयोध्या नगरी पहुँचेगी, जहाँ पडूकशिला पर जन्माभिषेक होगा। इसके बाद बाल क्रीड़ा का आयोजन होगा।
स्वयं का पुण्य स्वयं ही नष्ट न करें
महाराजश्री ने कहा कि मनुष्य स्वयं अपने पुण्य को नष्ट कर रहा है।
उन्होंने कहा—
“मैं अपनी खुद की बरबादी नहीं करूँगा। दुनिया मार दे तो कोई बात नहीं, लेकिन मैं अपने आप से आत्मघात नहीं करूँगा। मैं अपने धन से गुटखा–तंबाकू खाकर अपने जीवन को नष्ट नहीं करूँगा।”
उदाहरण देते हुए कहा कि भुज के भूकंप में बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले कई लोग दबकर मर गए, जबकि सामने झोपड़ी में रहने वाले बच गए। इसलिए भगवान को कभी दोष न दें।
उन्होंने कहा—
“ऊपर वाले पर संदेह मत रखो। हो सकता है कि इसी में आपका भला हो। हमेशा सकारात्मक विचार रखें।”


