दिल्ली में हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और इसका असर अब लोगों पर भी दिखने लगा है। इसी बीच सामने आई एक चौंकाने वाली मेडिकल रिपोर्ट ने सबको हैरान कर दिया है नीति आयोग में काम करने वाली 35 वर्षीय ब्यूरोक्रैट को फेफड़े का चौथे स्टेज का कैंसर हो गया। खास बात यह है कि वह कभी भी स्मोकिंग नहीं करती थीं और उनके परिवार में भी किसी को ऐसा कैंसर नहीं था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला शायद दिल्ली के प्रदूषण से जुड़ा है, जो बिना स्मोकिंग करने वालों के फेफड़ों को भी तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है।
विशेषज्ञों ने एक और डराने वाली बात बताई ऐसे मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं जिन्हें पहले कभी सांस की दिक्कत नहीं हुई, लेकिन अब अचानक खांसी, जुकाम और सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है। प्रदूषण के कारण नाक बंद होना, आंखों में जलन, लगातार पानी बहना और यहां तक कि नाक से खून निकलना भी देखने को मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से लोग पहली बार अस्थमा के शिकार बन रहे हैं, और यह आने वाले सालों में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।
सिगरेट न पीने वालों में भी फेफड़े का कैंसर बढ़ रहा
पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ा डरावना बदलाव यह देखने को मिला है कि गैर-स्मोकर्स में भी फेफड़े का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। पहले यह बीमारी आमतौर पर स्मोकिंग या जेनेटिक फैक्टर से जुड़ी मानी जाती थी, लेकिन अब 25 से 35 साल के युवा, जो न स्मोकिंग करते हैं और न परिवार में कोई इतिहास है, वे भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। प्रदूषण इसका एक बड़ा कारण हो सकता है, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि अन्य कारणों की भी गहराई से जांच जरूरी है, क्योंकि कैंसर के मामलों में इतनी तेजी पहले कभी नहीं देखी गई।


