Thursday, April 23, 2026

आत्मा ज्ञान दर्शन स्वरूप है : मुनि मुमुक्षु सागर महाराज

भगवान मल्लिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक पर पूजा अर्चना की

निवाई। आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के सानिध्य में शताब्दी समारोह मनाया जाने को लेकर आगामी निवाई में अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसको लेकर तैयारियां जोरों पर है। अखिल भारतीय जैन धर्म प्रचारक विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने बताया कि सोमवार को सन्त निवास नसियां जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान मल्लिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव पर पूजा अर्चना की। इसके बाद चोका पुण्यार्जक परिवार रमेश चंद सुशील कुमार गिन्दोडी, महावीर प्रसाद सुनील चेनपूरा, सुभाष चंद धनराज जैन चंवरिया, पारसमल शंभु जैन चेनपुरा, गोपाल लाल शंभु कुमार जैन कठमाणा, सन्मति कुमार सुकुमार जैन महिपाल जैन एवं मोहित जैन चंवरिया, पदमचंद राजेन्द्र कुमार जैन सांवलिया, एवं केलाश चंद अशोक कुमार पवन कुमार जैन बोहरा के निवास पर इन्दौर वाला परिवार ने पड़गाहन विधि पूर्वक आहार चर्या करवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

इस दौरान मुनि श्री मुमुक्षु सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो आत्मा को पवित्र करें निर्मल बनायें वह पुण्य है और जो आत्मा का पतन करें आत्मा को विकृत करें, दुर्गति में ठोकरें दिलाये वह पाप है। आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज संध के शिष्य मुनि श्री मुमुक्षु सागर महाराज ने शीतकालीन प्रवास के दौरान श्रद्धालुओं को कहा कि आगम और अध्यात्म की अपेक्षा जिससे सौभाग्य जगे, भाग्य फले, मन चिंतित कार्य सम्पूर्ण हो, पांचों इंद्रियों की अनुकूलता मिल जाए एवं शरीर में आधि व्याधियां प्रवेश न करें, सारे संसार में इच्छित वस्तुएं मिल जाए उसे पुण्य कहते हैं। जिससे अनुकूलता मिले वह पुण्य और जिससे प्रतिकूलता मिले वह पाप है। आत्मा ज्ञान दर्शन स्वरूप है और पुण्य पाप अचेतन जड़ रुप है। किन्तु संसारी प्राणी पुण्य और पाप के मध्य उलझकर अपना सर्वस्व कर्मों के ऊपर डाल देता है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार श्रावकों के अपने कर्तव्य है उसी प्रकार मुनिराजो के भी अपने कर्तव्य है। अपने अपने कर्तव्य का पालन करके ही अपनी अपनी मर्यादा का पालन करके ही विश्व के समस्त प्राणी अपने अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। जौंला ने बताया कि धर्म सभा के पश्चात जैन समाज के मंत्री महावीर प्रसाद पराणा, दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के मंत्री मोहित चंवरिया, दिगम्बर जैन अग्रवाल समाज अध्यक्ष विष्णु बोहरा, दिगम्बर जैन चौरासी समाज के संरक्षक हुकमचंद जैन, लायंस क्लब के दिनेश चंवरिया, प्रमुख समाजसेवी सन्मति चंवरिया, गोपाल कठमाणा, शंभु कठमाणा, त्रिलोक सिरस, महेन्द्र चंवरिया, प्रेमचंद सांवलिया, शिखरचंद काला, चेतन चंवरिया, पदमचंद टोंग्या, राकेश संधी, हेमंत चंवरिया, सुरेश पाटनी, पवन बोहरा, त्रिलोक रजवास, आशीष चंवरिया, अतुल ठोलिया, गोलू चंवरिया, प्रेमचंद सोगानी, त्रिलोक हरभगतपुरा, सहित कई श्रद्धालुओं ने श्री फल चडा़कर पूजा अर्चना की। विमल जौंला ने बताया कि शीतकालीन प्रवास के चलते सांयकाल प्रश्न मंच कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसमें धनराज चंवरिया, दिनेश गिन्दोडी, ने विजेताओं को पुरस्कार दिया।

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