गुन्सी विज्ञा तीर्थ क्षेत्र पर आर्यिका सुविधिमति माताजी का मंगल प्रवेश हुआ
निवाई। भारत वर्षीय सकल दिगम्बर जैन समाज विज्ञा तीर्थ के तत्वावधान में जैन आर्यिका ज्ञान श्री माताजी के सानिध्य में भगवान पुष्पदंत का जन्म और तप कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने विश्व में शांति की कामना करते हुए भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा की। विज्ञा तीर्थ चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष विष्णु बोहरा एवं मीडिया प्रभारी विमल जौंला ने बताया कि शुक्रवार को सुबह आचार्य अभिनन्दन सागर महाराज की शिष्या आर्यिका सुविधि मति माताजी का मंगल प्रवेश हुआ मंगल प्रवेश के दौरान कमेटी द्वारा अगुवानी की गई। शुक्रवार को सुबह आर्यिका ज्ञान मति माताजी के निर्देशन में विधिवत मंत्रोच्चार द्वारा सामूहिक शांतिधारा की गई जिसमें सर्व प्रथम भगवान जिनेन्द्र देव के अभिषेक करने का सौभाग्य दिगम्बर जैन अग्रवाल समाज अध्यक्ष विष्णु बोहरा ओमप्रकाश ललवाडी़ विमल पाटनी डब्बू संधी सहित कई श्रद्धालुओं को मिला।
विज्ञा तीर्थ के संयोजक महावीर प्रसाद पराणा ने बताया कि भगवान पुष्पदंत जी के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव पर आदीनाथ भगवान पुष्पदंत भगवान शांतिनाथ भगवान एवं महावीर स्वामी जी के अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना की गई। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने माताजी के श्री फल चडा़कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर आर्यिका ज्ञान श्री माताजी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का हर मानव दुखी है बैचेन है, परेशान हैं। भौतिकता प्रधान इस यांत्रिक तकनीकी युग में उसकी व्यस्तता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है हमारी इन बढ़ती हुई इच्छाओं ने हमें विकास की सीमा के समीप नहीं पहुंचाया किन्तु विनाश के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया अतः हम जीवन की यथार्थता को पहचाने एवं इच्छाओं को नियंत्रित करें। अगर हमने अपनी इच्छाएं नियंत्रित नहीं की तो हमारा विनाश निश्चित है। इच्छाएं जिसकी दास बन जाती है वह तिर जाता है और जो इच्छाओं का दास बन जाता है उसे इच्छाएं संसार सागर में डुबो देती है।


