जयपुर। जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क राजस्थान की प्राकृतिक धरोहरों में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाना जाता है। यह पार्क न केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। पार्क की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, वन्यजीवों की सतत सुरक्षा और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देना है। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क अपनी विस्तृत वनस्पति और जीव-जंतुओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से विविध प्रजातियों का आवास है, जिसमें कई दुर्लभ जीव भी शामिल हैं। यहां फैला हरा-भरा जंगल और शांत वातावरण पशु-पक्षियों के सुरक्षित निवास के लिए आदर्श माना जाता है। यदि आप बर्ड वॉचिंग के शौकीन हैं, तो नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं होगा। यहां 285 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं, जिनमें सबसे आकर्षक है व्हाइट-नेप्ड टिट — यह पक्षी केवल इसी क्षेत्र में पाया जाता है, जिससे पार्क की विशिष्टता और भी बढ़ जाती है। पार्क के भीतर स्थित राम सागर भी पक्षी प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय है। यहां विविध प्रकार के पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण में देखा जा सकता है, जो फोटोग्राफी और शांत प्राकृतिक अवलोकन के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थान है। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के आसपास स्थित गंगा विलास, गोपाल विलास और ललित विलास जैसे भवन कभी जयपुर के महाराजाओं के शिकार लॉज हुआ करते थे। वर्तमान में ये पुराने दिनों की शान और स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण हैं। इन स्थानों का भ्रमण करते हुए पर्यटक राजस्थान की राजसी परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को निकट से महसूस कर सकते हैं।

नाहरगढ़ जूलॉजिकल पार्क भी पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय
पार्क परिसर में स्थित नाहरगढ़ जूलॉजिकल पार्क भी पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। यहां एशियाई शेर, बंगाल टाइगर, पैंथर, लकड़बग्घा, भेड़िया, हिरण की कई प्रजातियाँ, मगरमच्छ, स्लॉथ बेयर, हिमालयी ब्लैक बेयर और जंगली सूअर जैसे कई वन्यजीव संरक्षित वातावरण में रहते हैं। यह जगह बच्चों और परिवारों के लिए एक शैक्षणिक और रोचक अनुभव प्रदान करती है, जहाँ वे वन्यजीवों को करीब से समझ सकते हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवों के अनोखे मेल का अनुभव कराता है। चाहे आप शोधकर्ता हों, पर्यटक हों या वन्यजीव प्रेमी—यह स्थान आपको प्रकृति के करीब ले जाता है और राजस्थान की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर का शानदार परिचय कराता है।
समय और अवकाश
—अवकाश: हर मंगलवार
—समय (ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु): सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक
—समय (शीत ऋतु): सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक


