Thursday, October 29, 2026

शाश्वत तीर्थ अयोध्या में शरद पूर्णिमा महोत्सव की धूम, तीस चौबीसी जिनमंदिर पर हुआ कलशारोहण; गणिनी ज्ञानमती माताजी का 93वां जन्मोत्सव और 75वां संयम दिवस मनाया

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अयोध्या | शाबाश इंडिया।

शाश्वत तीर्थ अयोध्या स्थित दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में त्रिदिवसीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत चारित्रचंद्रिका गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 93वां जन्मोत्सव एवं 75वां संयम दिवस 26 अक्टूबर को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर तीस चौबीसी जिनालय के शिखर पर कलशारोहण एवं ध्वजारोहण सहित अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। महोत्सव पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ।

प्रातःकाल रायगंज स्थित बड़ी मूर्ति भगवान ऋषभदेव का पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद परिसर में स्थित तीस चौबीसी जिनालय के शिखर पर कलशारोहण एवं ध्वजारोहण हुआ। मध्य शिखर पर कुलाधिपति सुरेश जैन, मुरादाबाद; दाईं ओर जिनराज जैन, दिल्ली तथा बाईं ओर गजराज जैन, दिल्ली की ओर से कलशारोहण किया गया। कलशों को बग्गी में विराजमान कर परिसर में भ्रमण कराया गया। इसके बाद भक्तों ने हर्षोल्लास के साथ मंदिर के शिखर पर कलशारोहण एवं ध्वजारोहण संपन्न किया।

ज्ञानाराधना पूजन संयम और तप की आराधना है : गणिनी ज्ञानमती माताजी

शरद पूर्णिमा महोत्सव की मुख्य सभा की अध्यक्षता तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद के कुलाधिपति सुरेशचंद जैन ने की। तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन, गाजियाबाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के करकमलों से 108 जोड़ों द्वारा सरस्वती एवं महालक्ष्मी की अर्चना-पूजा की गई। इसके प्रमुख पात्र अमित पहाडे, हैदराबाद तथा मीना-सज्जन कुमार जैन, खार, मुंबई रहे। इसके बाद पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की ज्ञानाराधना 75 मंत्रों के माध्यम से संपन्न हुई। माताजी की 93 अर्घ्यों से समन्वित पूजन का सौभाग्य नितिन नखाते, नागपुर; सुभाषिनी जैन; प्रतीक जैन, बनारस; अनिल जैन संघपति, दिल्ली तथा विजय जैन, राजपुर रोड, दिल्ली को प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने आशीर्वचन देते हुए कहा, “यह पूजन हमारी नहीं, संयम और तप की पूजा है। त्याग से ही व्यक्ति महान बनता है और उसके गुणों की पूजा की जाती है।” उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि 74 वर्ष पूर्व उन्होंने गृहत्याग किया था। उस समय कुंवारी कन्याओं का घर से निकलना भी असामान्य माना जाता था, लेकिन त्याग और वैराग्य की भावना के साथ उनकी माता से मिले संबल ने उन्हें इस मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

विभिन्न पुरस्कारों से किया गया सम्मान

माताजी के जन्मोत्सव पर आर्यिका श्री रत्नमती नारी सम्मान से कुसुमलता जैन, दिल्ली; अनीता जैन, दिल्ली; सुषमा जैन, टिकैतनगर; सुनीता कासलीवाल, संभाजीनगर तथा अर्चना जैन, डालीगंज, लखनऊ को सम्मानित किया गया। जम्बूद्वीप पुरस्कार गजेन्द्र जैन, फर्रुखनगर, हरियाणा को प्रदान किया गया।

अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि सामाजिक सेवाओं के लिए लाला छोटेलाल जैन स्मृति पुरस्कार डॉ. चन्द्रकांत नेमिनाथ चौगुले, सांगली को दिया गया। आर्यिका श्री रत्नमती पुरस्कार श्रीमती अनोपबाई पुखराज पाण्ड्या, गोरखपुर को प्रदान किया गया। संस्थान का सर्वोच्च सम्मान गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार श्रीमती आरती प्रकाशचंद जैन ‘शीशे वाले’, प्रयागराज को दिया गया।

इस अवसर पर तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद की बालिकाओं ने सुंदर भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया। संयम दिवस पर माताजी को पिच्छी भेंट करने का सौभाग्य अर्चना जयचंद कासलीवाल एवं भूषण कासलीवाल, चांदवड़ को मिला। कमंडलु कैलाशचंद-आदीश कुमार, अमृत एवं आगम जैन परिवार, लखनऊ की ओर से तथा शास्त्र जयकुमार-अशोक कुमार जैन, टिकैतनगर की ओर से भेंट किया गया। मुख्य पादप्रक्षालन का सौभाग्य अशोक जैन, चांदवाड़-जयपुर को प्राप्त हुआ।

93 विद्युत दीपों का प्रज्ज्वलन अतुल जैन, राकेश जैन, विनोद जैन एवं राजकुमार जैन, दिल्ली तथा गणिनी ज्ञानमती भक्तमंडल, महाराष्ट्र के भक्तों द्वारा किया गया। भरूच से पधारे भट्टारक श्री अरिहंतकीर्ति स्वामीजी ने समस्त भट्टारक परिषद की ओर से माताजी को जन्मदिवस पर ‘महायोगिनी’ की उपाधि प्रदान करते हुए विशाल प्रशस्ति भेंट की।

कार्यक्रम का ध्वजारोहण संजय-रेखा दीवान, सूरत ने किया। टिकैतनगर बालिका मंडल ने भी भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया। मंगलाचरण श्री सुभाषचंद जैन सर्राफ, लखनऊ ने किया। संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन एवं विजय कुमार जैन, मंत्री, अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी ने किया। संयम दिवस पर विभिन्न प्रांतों से आई महिलाओं को साड़ी भेंट की गई।

1008 दीपकों से हुई मंगल आरती, 22 प्रांतों से पहुंचे श्रद्धालु

सायंकाल पूज्य माताजी की मंगल आरती 1008 दीपकों से की गई। भजन गायक रूपेश जैन ने भक्ति गीतों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं। रात्रि 9:15 बजे माताजी के जन्मसमय पर विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालुओं ने थाली बजाकर जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने उपस्थित भक्तों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। देश के लगभग 22 प्रांतों से हजारों श्रद्धालु पहुंचकर महासाधिका की जन्मजयंती एवं संयम महोत्सव में शामिल हुए।

भव्य रथयात्रा के साथ संपन्न हुआ महोत्सव

महोत्सव के समापन अवसर पर 27 अक्टूबर को प्रातः 6 बजे से अभिषेक, भगवान ऋषभदेव की विशाल प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक और पूजा सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए। इस दौरान विशेष अतिथियों कैलाश सराफ, लखनऊ; प्रमोद जैन, मॉडल टाउन, दिल्ली; धर्मेंद्र जैन, दिल्ली; जवाहर लाल, सिकंदरा; पारस चैनल के निदेशक प्रकाश मोदी, भाटापारा; दैनिक विश्व परिवार के प्रदीप जैन, रायपुर; पारस जैन, अहमदाबाद; हसमुख गांधी, इंदौर; अशोक चांदवाड़, जयपुर; उदयभान जैन, राष्ट्रीय महामंत्री; दिलीप जैन, जयपुर; कमल कासलीवाल, मुंबई; योगेश लुणदिया, अहमदाबाद; यशवंत शाह, सूरत; सी.आर. पाटिल, अधिष्ठाता, मांगीतुंगी; वीर सेवक मंडल, टिकैतनगर के भक्तों तथा प्रमोद कासलीवाल, महाराष्ट्र सहित अन्य अतिथियों का स्वागत-अभिनंदन किया गया।

इसके बाद श्रीजी की भव्य रथयात्रा अयोध्या रायगंज जैन मंदिर से तपसी छावनी होते हुए पुनः जैन मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। सायंकाल श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुमां की महाआरती की और देर रात तक शाश्वत तीर्थ क्षेत्र में भक्ति का वातावरण बना रहा।

समापन अवसर पर पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने सभी को आशीर्वचन प्रदान करते हुए आभार व्यक्त किया।

प्रेषक : उदयभान जैन, जयपुर

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