Tuesday, October 27, 2026

शरद पूर्णिमा की चांदनी में गूंजे प्रेम, पीड़ा और संवेदना के गीत, ‘गीत चांदनी-2026’ में कवियों ने बांधा समां

जयपुर | शाबाश इंडिया।

शरद पूर्णिमा की दुधिया चांदनी, अमृतवर्षा का अहसास और गीतों की मधुर स्वर लहरियाँ—इसी मनोहारी वातावरण में राइटर क्लब की ओर से अजमेर रोड स्थित एक होटल में ‘गीत चांदनी-2026’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। देश-प्रदेश के ख्यातनाम कवियों एवं कवयित्रियों ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गीतों की मिठास ऐसी छाई कि श्रोता भी साथ-साथ गुनगुनाने लगे।

सम्मान समारोह के साथ हुआ शुभारंभ

नोएडा से पधारीं कवयित्री डॉ. सरिता शर्मा ने सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर डॉ. श्याम सुंदर शर्मा ‘अकिंचन’ को डॉ. तारा प्रकाश जोशी स्मृति सम्मान तथा डॉ. सरिता शर्मा को विशंभर मोदी स्मृति सम्मान प्रदान किया गया। दोनों साहित्यकारों को शॉल, नारियल, स्मृति चिह्न, माला एवं सम्मान राशि भेंट कर सम्मानित किया गया।

गीतों और दोहों ने बांधा समां

डॉ. सरिता शर्मा ने प्रेम की आध्यात्मिक अनुभूति को स्वर देते हुए सुनाया—

है कभी पीड़ा, कभी आनंद है, प्राण से यह प्राण का अनुबंध है। देह कैसे गा सकेगी प्रेम को, प्रेम केवल आत्मा का छंद है।

भदोही से पधारीं कवयित्री शिल्पी बरनाला ने अपनी रचना से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी—

समझते हैं भ्रमर केवल महकते फूल की महिमा, कोई प्यासा बताएगा नदी के कूल की महिमा।

बांसवाड़ा के कवि तारेश दवे ने प्रेम और सकारात्मकता से सराबोर गीत प्रस्तुत किया—

तुम जहाँ से लौट आए दर्द लेकर, मैं वहीं से गीत लेकर आ रहा हूँ। नफ़रतें तुमको मिलीं, मैं उस गली से, प्यार आशातीत लेकर आ रहा हूँ।

फालना से पधारीं डॉ. कविता किरण ने अपनी लोकप्रिय पंक्तियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया—

छोड़कर चाँद-तारे गगन आ गई, प्रीत की लेके शीतल पवन आ गई। लाखों रोका इसे गर्दिशों ने मगर, चीरकर बादलों को किरण आ गई।

कोटा के कवि नारायण हलधर ने अपने दोहों के माध्यम से श्रोताओं को भावनाओं के विविध रंगों से परिचित कराया—

अंत समय और सामने, गोरी तेरे नैन। रामादल में आ गए, जैसे वैद सुशेन।

किसने बोले साँवली, बदली कड़वे बैन। आँसू ढुलकाती रही, छत पर सारी रैन।

मथुरा से पधारे डॉ. श्याम सुंदर शर्मा ‘अकिंचन’ ने अपनी संवेदनशील रचना से श्रोताओं का मन मोह लिया—

चोट दर चोट सहता है, ये घायल का मुकद्दर है, लिपटकर पाँव से बजती ये पायल का मुकद्दर है।

अकिंचन दीद को कोई उमर सारी तरसता है, नैन में चैन से सोता ये काजल का मुकद्दर है।

कवि जगदीश मोहन रावत ‘कुंडा’ ने किया प्रभावशाली संचालन

कार्यक्रम का संचालन कर रहे मथुरा के कवि जगदीश मोहन रावत ‘कुंडा’ ने अपनी प्रस्तुति से भी श्रोताओं को प्रभावित किया। उन्होंने जीवन, कर्म और समय की सच्चाई को उजागर करते हुए सुनाया—

पाप से न जोड़िए, साथ कुछ न जाएगा, काल का प्रसार कठिन, तन में सह न पाएगा। पाप हो कि पुण्य हो, सामने तो आएगा, जो भरा तिजोरियों में, छूट यहीं जाएगा।

गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति

राइटर क्लब के अध्यक्ष लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह, अनुराग मोदी तथा सीआईडी के डॉ. सारूखे नरेंद्र गुप्ता अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर गीतों और काव्य रचनाओं का आनंद लिया।

कार्यक्रम का समापन श्रोताओं को खीर वितरित कर किया गया। ‘गीत चांदनी-2026’ ने शरद पूर्णिमा की चांदनी में साहित्य, संगीत और काव्य-संवेदना का यादगार संगम प्रस्तुत किया।

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