
भीलवाड़ा | शाबाश इंडिया।
29 दिवसीय पुच्छिस्सुणं संपुट जाप की पूर्णाहुति, रविवार से नवपद आयंबिल ओलीजी आराधना शुरू
शांतिभवन, भोपालगंज में 29 दिवसीय महाप्रभावक पुच्छिस्सुणं संपुट सामूहिक जाप की पूर्णाहुति पर आयोजित धर्मसभा में श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी ने कहा कि साधना की पूर्णाहुति अंत नहीं, बल्कि अर्जित ऊर्जा को अगले पुरुषार्थ में लगाने का मंगल अवसर है। आराधना तभी सार्थक है, जब उससे प्राप्त श्रद्धा, कृतज्ञता और संस्कार जीवन का स्थायी हिस्सा बनें।
युवाचार्यश्री ने 29 दिनों तक नियमित रूप से साधना में सहभागी रहे श्रावक-श्राविकाओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि जैन आराधना का मूल आधार तीर्थंकरों की वाणी और उनके द्वारा बताया गया साधना-पथ है। उन्होंने कहा कि आरंभ और समापन, दोनों का अपना महत्व है। इस आराधना की शुरुआत मासखमण तप की पचकावनी से हुई और पूर्णाहुति भी तपस्या को प्रभु चरणों में अर्पित कर की गई।
समापन पद का मर्म समझाते हुए उन्होंने कहा कि अरिहंत द्वारा प्रतिपादित धर्म को केवल सुनना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे सही अर्थ में श्रद्धापूर्वक ग्रहण करना जरूरी है। श्रद्धा विवेक छोड़ना नहीं, बल्कि उस वाणी पर विश्वास रखना है जो कल्याण का मार्ग दिखाती है। उन्होंने वाणी की शुद्धता, सार्थक शब्दों और जिम्मेदार आचरण पर भी जोर दिया।
युवाचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य को वर्तमान के क्षणिक लाभ में उलझकर कर्मों के दूरगामी परिणाम नहीं भूलने चाहिए। हिंसा, छल या किसी को हानि पहुंचाकर प्राप्त लाभ शुभ फल नहीं दे सकता। धर्मश्रवण और आराधना व्यक्ति को शुभ कर्मों की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से पुच्छिस्सुणं के स्वाध्याय को आगे भी जारी रखने का आह्वान किया। जाप, स्वाध्याय, एकासन और आयंबिल जैसे आराधना क्रम तभी सार्थक हैं, जब उनसे प्राप्त संस्कार व्यवहार में उतरें।
धर्मसभा से पूर्व युवाचार्य प्रवर के सान्निध्य में हितमितभाषी हितेन्द्र ऋषिजी, यशोदीप्ति मधुकंवरजी, महासती सुचेताजी, स्मितभाषी पियूषदर्शनाजी सहित संत-साध्वीवृंद ने सामूहिक जाप करवाया। शहर एवं उपनगरों के विभिन्न श्रीसंघों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। भलावत परिवार की ओर से श्रद्धालुओं को प्रभावना प्रदान की गई।
श्रीसंघ मंत्री नवरतनमल भलावत ने बताया कि रविवार से युवाचार्यश्री एवं साध्वीवृंद के सान्निध्य में नवपद आयंबिल ओलीजी आराधना प्रारंभ होगी।
— सुनील चपलोत शांतिभवन, भोपालगंज, भीलवाड़ा


