
जयपुर | शाबाश इंडिया।
खुजली (Pruritus) त्वचा से जुड़ी एक आम समस्या है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार त्वचा खुजलाने की इच्छा होती है। यह शरीर के किसी एक हिस्से या पूरे शरीर में हो सकती है। कभी-कभी खुजली केवल त्वचा के रूखेपन के कारण होती है, जबकि अन्य मामलों में एलर्जी, फंगल संक्रमण, स्केबीज (खुजली के सूक्ष्म कीट) या शरीर के अंदर होने वाली कुछ बीमारियां भी इसकी वजह हो सकती हैं। खुजली इतनी तेज हो सकती है कि व्यक्ति बार-बार खुजलाते हुए त्वचा से खून तक निकाल लेता है।
खुजली का सही उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है। हर प्रकार की खुजली में एक ही दवा प्रभावी नहीं होती। इसलिए खुजली का कारण पहचानना और उसी के अनुसार उपचार कराना जरूरी है।
खुजली होने के प्रमुख कारण
1. त्वचा का रूखापन: सर्दियों में, गर्म पानी से नहाने, बार-बार साबुन लगाने या त्वचा में नमी की कमी होने से खुजली हो सकती है।
2. एलर्जी: साबुन, क्रीम, डिटर्जेंट, कपड़े, धूल, इत्र, कुछ खाद्य पदार्थों या दवाओं के कारण त्वचा में एलर्जी की प्रतिक्रिया हो सकती है।
3. फंगल संक्रमण (दाद): यह समस्या विशेष रूप से कमर, जांघों और त्वचा की सिलवटों में हो सकती है।
4. स्केबीज: त्वचा में सूक्ष्म परजीवी के संक्रमण से होने वाली इस समस्या में अक्सर रात के समय खुजली बढ़ जाती है। घर के अन्य लोगों को भी खुजली होना इसका संकेत हो सकता है।
5. एक्जिमा: इसमें त्वचा पर सूखापन, लालिमा, सूजन और खुजली होती है।
6. पित्ती (Urticaria): त्वचा पर उभरे हुए, खुजलीदार चकत्ते बन जाते हैं।
7. कीड़े-मच्छर के काटने से: काटने वाली जगह पर लालिमा, सूजन और खुजली हो सकती है।
8. आंतरिक बीमारियां: कभी-कभी लिवर, किडनी, थायरॉइड या मधुमेह से जुड़ी समस्याओं के कारण भी खुजली हो सकती है।
9. अन्य कारण: कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, गर्भावस्था की विशेष स्थितियां या बिना स्पष्ट चकत्तों के होने वाली खुजली भी इसके कारण हो सकते हैं।
खुजली के प्रमुख लक्षण
- त्वचा को बार-बार खुजलाने की इच्छा होना।
- त्वचा पर लालिमा, छोटे दाने या चकत्ते दिखाई देना।
- त्वचा का रूखा, पपड़ीदार या फटा हुआ होना।
- खुजलाने के बाद जलन, घाव या खून निकलना।
- रात के समय खुजली का बढ़ जाना।
- गोलाकार चकत्ते बनना या उनके किनारों पर पपड़ी जमना।
- कुछ मामलों में बिना किसी स्पष्ट चकत्ते के पूरे शरीर में खुजली होना।
खुजली के प्रमुख प्रकार
1. फंगल खुजली (दाद): इसमें गोलाकार लाल चकत्ते, किनारों पर पपड़ी और खुजली हो सकती है। इसके लिए उचित एंटीफंगल उपचार की आवश्यकता होती है।
2. स्केबीज (खुजली के कीट): उंगलियों के बीच, कलाई, कमर और शरीर की सिलवटों में खुजली हो सकती है, जो अक्सर रात में ज्यादा होती है। इसमें परजीवी को खत्म करने वाला प्रमाणित उपचार जरूरी है।
3. एक्जिमा (Eczema): त्वचा में सूखापन, लालिमा, पपड़ी और बार-बार खुजली होना इसके सामान्य लक्षण हैं।
4. पित्ती (Urticaria): त्वचा पर उभरे हुए लाल या त्वचा के रंग के चकत्ते बनते हैं। ये चकत्ते कुछ समय में अपना आकार या स्थान बदल सकते हैं।
5. रूखी त्वचा से होने वाली खुजली: त्वचा खुरदरी, रूखी और कभी-कभी फटी हुई दिखाई देती है। नियमित रूप से मॉइस्चराइजर लगाने से राहत मिल सकती है।
खुजली की जांचें
हर मरीज को सभी जांचों की आवश्यकता नहीं होती। डॉक्टर खुजली के लक्षणों, त्वचा की स्थिति और संभावित कारण के अनुसार जांच करवाते हैं।
- त्वचा का परीक्षण: खुजली के प्रकार, दानों और चकत्तों की पहचान के लिए।
- स्किन स्क्रैपिंग: फंगल संक्रमण या स्केबीज की जांच के लिए।
- एलर्जी परीक्षण: विशेष परिस्थितियों में संभावित एलर्जी का पता लगाने के लिए।
- सीबीसी और अन्य रक्त जांच: जरूरत के अनुसार एनीमिया या अन्य समस्याओं का आकलन करने के लिए।
- लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट: पूरे शरीर में खुजली होने पर संभावित आंतरिक कारणों की जांच के लिए।
- थायरॉइड जांच: थायरॉइड संबंधी समस्या का संदेह होने पर।
- ब्लड शुगर जांच: मधुमेह की आशंका होने पर।
खुजली से बचाव एवं सावधानियां
- रोजाना बिना खुशबू वाला मॉइस्चराइजर लगाएं।
- नहाने के लिए हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
- त्वचा को जोर से न रगड़ें। खुजली होने पर ठंडी पट्टी रखें।
- ढीले और सूती कपड़े पहनें।
- सुगंधित साबुन, क्रीम या डिटर्जेंट से परेशानी होने पर उनका इस्तेमाल बंद करें।
- विशेष रूप से स्केबीज या संक्रामक फंगल संक्रमण होने पर तौलिया, कपड़े और बिस्तर साझा करने से बचें।
- बिना किसी प्रमाण के किसी खास खाद्य पदार्थ को खुजली का कारण मानकर अनावश्यक परहेज न करें।
ये उपाय खुजली कम करने और त्वचा को सुरक्षित रखने में सहायक हो सकते हैं।
खुजली का होम्योपैथिक उपचार
होम्योपैथी में उपचार चुनते समय चिकित्सक व्यक्ति के लक्षणों, खुजली के बढ़ने-घटने के समय, त्वचा की प्रकृति और अन्य शिकायतों का आकलन करते हैं। होम्योपैथी में खुजली के लिए कई दवाओं का उल्लेख मिलता है, लेकिन खुजली या त्वचा रोगों में इनके प्रभावशील होने के पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन्हें प्रमाणित चिकित्सा का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
होम्योपैथी में लक्षणों के आधार पर जिन दवाओं का उल्लेख किया जाता है, उनमें आर्सेनिक ऐल्बम, बैलेडोना, डल्केमारा, फेरम आर्सेनिक, ग्रेफायटिस, हिपर सल्फर, हाइपेरिकम, जैग्लैंस आर, कैली म्यूर, लैकेसिस, लाइकोपोडियम, मर्क सोल, मर्क कोर, मेजेरियम, नेट्रम म्यूर, नेट्रम आर्सेनिक, पेट्रोलियम, रस टॉक्स, रस वेनवेनेटा, सल्फर, सिलिसिया, सल्फ्यूरिक एसिड, थूजा, अर्टिका यूरेन्स और विंका माइनर आदि शामिल हैं।
इनमें से किसी भी दवा को हर प्रकार की खुजली की निश्चित या पेटेंट दवा नहीं माना जाना चाहिए। स्वयं दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लें और जरूरत पड़ने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच एवं उपचार करवाएं।
महत्वपूर्ण बातें
- फंगल संक्रमण में उचित एंटीफंगल उपचार को प्राथमिकता दें।
- स्केबीज में परजीवी को खत्म करने वाला प्रमाणित उपचार आवश्यक है।
- एलर्जी, एक्जिमा और पित्ती में कारण के अनुसार उपचार किया जाना चाहिए।
- होम्योपैथिक या किसी अन्य वैकल्पिक उपचार के कारण जरूरी जांच और प्रमाणित चिकित्सा में देरी न करें।
- पहले से चल रही निर्धारित दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना बंद न करें।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
यदि खुजली पूरे शरीर में हो, लगातार बनी रहे, बार-बार लौटे या नींद और दैनिक जीवन को प्रभावित करे, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। त्वचा या आंखों में पीलापन दिखाई देने पर भी जांच जरूरी है।
आपातकालीन स्थिति: खुजली के साथ अचानक होंठ, जीभ या गले में सूजन अथवा सांस लेने में कठिनाई हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
डॉ. एम.एल. जैन ‘मणि’
एम.ए., बी.एच.एम.एस. (होम्योपैथिक), पीएच.डी.
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ होम्योपैथ एवं पूर्व शैक्षणिक सदस्य, होम्योपैथिक विश्वविद्यालय, जयपुर।
मोबाइल: 8949032693


