
जयपुर | शाबाश इंडिया।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मानव सेवा ट्रस्ट राजस्थान एवं समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र (भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में फोर्टिस हॉस्पिटल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। राष्ट्रीय थीम पर आधारित इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश जीवंत अनुभवों को सुनना, वास्तविक आवाज़ों को महत्व देना और सकारात्मक बदलाव लाना रहा। सेमिनार में विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्वास्थ्य कल्याण होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ होम्योपैथ, आचार्य एवं चिकित्सक तथा ट्रस्ट सदस्य और मीडिया प्रभारी प्रो. डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव तभी संभव है, जब समाज प्रत्येक व्यक्ति की बात सुने, उसके अनुभवों का सम्मान करे और जरूरत के समय सहयोग के लिए आगे आए। उन्होंने कहा कि सशक्त मन से ही सशक्त समुदाय का निर्माण होता है। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और सहयोगपूर्ण वातावरण जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता पर जोर
सेमिनार का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों के अनुभवों को समझना तथा समाज में समावेशिता और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों के रूप में कम्पोजिट रीजनल सेंटर के निदेशक डॉ. नीरज मधुकर, इमरजेंसी एंड ट्रॉमा विभाग के कंसल्टेंट एवं प्रमुख डॉ. नितिन गुप्ता, मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंसेज के कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. तुषार कांत, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. निमिषा खंडेलवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुराधा गोस्वामी तथा महासचिव दुर्गा वर्मा ने भाग लिया।
विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण, तनाव प्रबंधन, आपातकालीन परिस्थितियों में मनोवैज्ञानिक सहयोग, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने और जरूरतमंद लोगों के लिए सुलभ सहायता प्रणालियों को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विचार साझा किए। संवाद एवं प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा और अपनी जिज्ञासाओं के उत्तर प्राप्त किए।
समावेशी समाज के निर्माण में सभी की भूमिका अहम
सेमिनार में परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक संगठनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात करना, जरूरतमंदों को समय पर सहयोग देना और सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है। ऐसा वातावरण विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें हर व्यक्ति बिना किसी संकोच के अपनी भावनाएं व्यक्त कर सके और जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त कर सके।
मानव सेवा ट्रस्ट राजस्थान एवं सीआरसी ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, दिव्यांगजन समावेशन और समुदाय आधारित सहयोग को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
एक माह से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान
कार्यक्रम संयोजक कौशल सत्यार्थी ने बताया कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में ट्रस्ट की ओर से पिछले एक माह से सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों में विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इनमें मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र, संवाद कार्यक्रम, ड्राइंग एवं चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियां शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इन पहलों का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, उन्हें अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकोच और सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना है।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर बृजेश गुप्ता, कौशल सत्यार्थी, ओम प्रकाश पोद्दार, नितेश, भास्कर, अंजलि, दिव्या सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


