
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
रंगों की अपनी जुबान होती है और रेखाओं की अपनी संवेदनाएं। कुछ कलाकार कैनवास पर केवल चित्र नहीं उकेरते, बल्कि अपनी कल्पनाओं, अनुभूतियों और जीवन-दर्शन को रंगों के माध्यम से ऐसी अभिव्यक्ति देते हैं, जो उनके जाने के बाद भी संवाद करती रहती है। राजस्थान की आधुनिक चित्रकला में ऐसी ही विशिष्ट पहचान रखने वाले वरिष्ठ चित्रकार, कलाविद् एवं टखमण-28 के संस्थापक सदस्य प्रो. शब्बीर हसन काज़ी अब अपनी कला-साधना और कृतियों के माध्यम से स्मृतियों में जीवित रहेंगे। 82 वर्षीय प्रो. काज़ी का 9 अक्टूबर को निधन हो गया। उनके निधन से राजस्थान सहित देश के कला जगत ने एक समर्पित और सृजनशील कलाकार खो दिया।
कैनवास पर रचा अमूर्त संवेदनाओं का अनूठा संसार
प्रो. काज़ी उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने राजस्थान में आधुनिक कला और अमूर्त चित्रण को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी चित्रकृतियों में रंग महज दृश्य आकर्षण नहीं, बल्कि भावनाओं और अनुभूतियों की सशक्त अभिव्यक्ति बनकर उभरते थे। विशिष्ट रंग-संयोजन, आलंकारिकता और अमूर्त संरचनाएं उनकी कलात्मक पहचान थीं। वे रंगों के माध्यम से उन भावों को अभिव्यक्त करने में सक्षम थे, जिन्हें शब्दों में कहना कठिन होता है।
उदयपुर विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग की स्नातकोत्तर कक्षाओं के शुरुआती बैच के विद्यार्थी रहे प्रो. काज़ी ने अपनी प्रतिभा और निरंतर कला-साधना के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। राजस्थान विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग में प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका कला से जुड़ाव निरंतर बना रहा।
टखमण से कला जगत तक छोड़ी अमिट छाप
टखमण-28 की स्थापना और उसकी रचनात्मक गतिविधियों में प्रो. काज़ी की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही। देश-विदेश की कला दीर्घाओं और कला शिविरों में उनकी सहभागिता ने राजस्थान की समकालीन चित्रकला को व्यापक पहचान दिलाने में योगदान दिया।
कला क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय ललित कला अकादमी, नई दिल्ली सहित विभिन्न संस्थाओं से सम्मान प्राप्त हुए। राजस्थान ललित कला अकादमी ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘कलाविद्’ सम्मान से अलंकृत किया। वे युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा, मार्गदर्शन और कलात्मक चिंतन के महत्वपूर्ण स्रोत रहे।
टखमण में नम आंखों से दी भावभीनी श्रद्धांजलि
प्रो. काज़ी के निधन पर टखमण कला संस्था में आयोजित शोकसभा में शहर के कलाकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कलाविद् प्रो. सुरेश शर्मा ने प्रो. काज़ी के विद्यार्थी जीवन से लेकर टखमण की विभिन्न कला गतिविधियों में उनके सक्रिय योगदान को याद करते हुए उनके रचनात्मक व्यक्तित्व और कला के प्रति समर्पण पर प्रकाश डाला।
वरिष्ठ कलाकार हर्ष छाजेड़ और रघुनाथ शर्मा ने भी उनके व्यक्तित्व, कलात्मक चिंतन और सृजन यात्रा से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। शोकसभा में वरिष्ठ कलाकार ललित शर्मा, सी.पी. चौधरी, बी.एम. पुजारी, मक़बूल अहमद, दिनेश उपाध्याय, संदीप पालीवाल और शर्मिष्ठा चावत सहित अनेक कला साधकों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
प्रो. काज़ी भले ही इस दुनिया से विदा हो गए हों, लेकिन उनके कैनवास पर बिखरे रंग आने वाली पीढ़ियों से संवाद करते रहेंगे। उनकी कलाकृतियां उनकी संवेदनाओं, कल्पनाओं और कला-दृष्टि की गवाही देती रहेंगी। क्योंकि सच्चा कलाकार अपनी कृतियों में हमेशा जीवित रहता है।
रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’ / फोटो: रघुनाथ शर्मा


