
इंदौर | शाबाश इंडिया।
धार्मिक संस्कारों और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने वाले अखिल भारतीय पाठशाला महाधिवेशन का शुभारंभ सोमवार को परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में मंगल कलश स्थापना, दीप प्रज्ज्वलन और चित्र अनावरण के साथ हुआ। देशभर से पाठशाला संचालकों और प्रतिनिधियों ने अधिवेशन में सहभागिता की। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार और नैतिक मूल्यों से जोड़ना तथा पाठशालाओं के कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाना है।
मंगल कलश स्थापना का सौभाग्य पुण्यार्जक परिवार डॉ. दिलीप वोवरा, अरविंद वोवरा (अमेरिका), सचिन सौरव बड़जात्या (इंदौर) सहित अन्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में चक्रवर्ती सपना मनीष गोधा, जैन समाज अध्यक्ष आनंद नवीन गोधा, चातुर्मास अध्यक्ष अशोक रानी दोशी, स्वागत अध्यक्ष संजय सामरिया, महामंत्री हर्ष जैन, कोषाध्यक्ष आकाश कोयला, धर्मेंद्र सिमकेम, गिरीश गन्नी, सौरव बड़जात्या, संजय पटौदी और राहुल स्पोर्ट्स सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
‘काम करो तो पूरी ताकत लगाकर करो’ : मुनि श्री सुधासागर जी
प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि आज दुनिया तेजी से भौतिकता की ओर बढ़ रही है, जबकि पाठशालाओं के माध्यम से समाज को धर्म और संस्कारों की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान समय में यह कार्य कठिन अवश्य है, लेकिन इसका महत्व भी उतना ही अधिक है।
आचार्यश्री ने जीवन में कर्म, पुरुषार्थ और जिम्मेदारी के महत्व को समझाते हुए कहा कि किसी भी कार्य को पूरी ताकत और समर्पण के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए पहले स्वयं प्रयास करना आवश्यक है। पूरी मेहनत करने के बाद भी अपेक्षित परिणाम न मिले, तभी संतोष के लिए भाग्य की बात कही जाती है। केवल भाग्य के भरोसे बैठकर काम करने के बजाय भगवान का नाम लेकर अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने सत्य के विषय में भी विचार रखते हुए कहा कि किसी बात को सत्य मानने के साथ-साथ उसे बताने से पहले ठीक से समझना भी आवश्यक है। उनके संदेश ने उपस्थित प्रतिनिधियों को आत्मचिंतन, पुरुषार्थ और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी।
‘पाठशाला की लालटेन दूसरों को टकराने से बचाती है’
मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने पाठशालाओं की भूमिका को समझाने के लिए लालटेन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे एक अंधा व्यक्ति अपने लिए नहीं, बल्कि सामने से आने वाले लोगों को टकराने से बचाने के लिए लालटेन लेकर चलता है, वैसे ही पाठशालाओं के माध्यम से दिए जाने वाले संस्कार समाज को गलत रास्तों से बचाने में सहायक होते हैं।
उन्होंने सांप के विष का उदाहरण देते हुए समझाया कि किसी शक्ति का होना अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन उसका गलत इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। इसी प्रकार ज्ञान और संस्कारों का उद्देश्य दूसरों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना होना चाहिए।
मुनि श्री ने पाठशालाओं से जुड़े सभी लोगों को इस संस्कार अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म और नैतिक शिक्षा की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचनी चाहिए।
सोमवार को निकलेगी भव्य शोभायात्रा और जागरण रैली
जैन समाज सामाजिक संसद से जुड़े राहुल स्पोर्ट्स ने कहा कि सोमवार का दिन इंदौरवासियों के लिए विशेष रहेगा। देशभर से आए मेहमान अपने द्वारा तैयार किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक शोभायात्रा के दौरान प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि पांच हजार से अधिक लोगों की सहभागिता के साथ प्रस्तावित जागरण रैली के माध्यम से ‘खुद जियो और दूसरों को जीने दो’ का संदेश दिया जाएगा।
पाठशालाओं के साथ प्रबंधन समितियों को भी निभानी होगी जिम्मेदारी
प्रदीप शास्त्री ने कहा कि पाठशालाओं से जुड़ी बहनों ने संस्कार निर्माण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है। अब पाठशालाओं की प्रबंधन समितियों को भी अपनी कुशलता और जिम्मेदारी के साथ इस संस्कार महाकुंभ को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने धार्मिक शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए बेहतर प्रबंधन, समन्वय और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
अखिल भारतीय पाठशाला महाधिवेशन के माध्यम से देशभर के प्रतिनिधियों को अपने अनुभव साझा करने और संस्कार आधारित शिक्षा को नई दिशा देने का अवसर मिला। आयोजन का मूल संदेश रहा कि धर्म, नैतिकता और जीवन मूल्यों की शिक्षा के माध्यम से ही नई पीढ़ी को जिम्मेदार, संवेदनशील और संस्कारित बनाया जा सकता है।


