
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
देवर्षि नारद का मोह और अहंकार, हनुमान चालीसा की गूंज, भगवान लक्ष्मीनारायण की महाआरती और श्रद्धालुओं के मुख से उठता ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष। शुक्रवार की शाम उदयपुर के निम्बार्क महाविद्यालय मैदान में भक्ति और आस्था का ऐसा ही वातावरण देखने को मिला। अवसर था दस दिवसीय भव्य श्रीरामलीला के शुभारंभ का, जहां अभिनय, संगीत और भारतीय संस्कृति की सनातन परंपराओं का अद्भुत संगम नजर आया।
संकटमोचन हनुमान की स्तुति, गुरु वंदना और भगवान लक्ष्मीनारायण की महाआरती के साथ रामलीला का आगाज हुआ। दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुए आयोजन में श्रद्धालुओं के जयकारों ने पूरे परिसर को राममय बना दिया।
नारद के अहंकार से मोहभंग तक की लीला ने बांधा समां
रामलीला के पहले दिन वृंदावन के पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान के कलाकारों ने नारद मोह, भगवान के अवतार का प्रयोजन और रामलीला की पृष्ठभूमि से जुड़े प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया। पारंपरिक वेशभूषा, सजीव संवाद, संगीत और भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को पौराणिक कथाओं से जोड़ दिया। देवर्षि नारद के मोहभंग और अहंकार के शमन का प्रसंग विशेष आकर्षण रहा।
समिति अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने कहा कि भगवान श्रीराम तक पहुंचने का मार्ग हनुमानजी की अनन्य भक्ति से होकर गुजरता है। रामलीला केवल धार्मिक मंचन नहीं, बल्कि जीवन में मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और आदर्शों को आत्मसात करने की प्रेरणा भी है।
संतों के सान्निध्य में जनप्रतिनिधियों ने की महाआरती
अस्थल आश्रम के महंत रास बिहारी शरण के सान्निध्य में सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, महापौर पारस सिंघवी, उपमहापौर दिनेश भट्ट तथा शहीद मुस्तफा के माता-पिता फातिमा बोहरा एवं जकीउद्दीन बोहरा सहित अनेक गणमान्यजनों ने महाआरती की।
इस अवसर पर नरेंद्र पालीवाल, राधेश्याम सिखवाल, मनोहर सुखवाल, परसराम सूयल, डॉ. प्रदीप कुमावत, गिरीश माहेश्वरी और लंदन से आए बजरंग सिंह राठौड़ उपस्थित रहे। महासचिव भंवरलाल शर्मा ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत अशोक बाबेल, दिनेश गुप्ता, दुर्गेश चौबीसा, विक्रम मेनारिया, दीपक डांगी, कौशल मूंदड़ा एवं मगन जोशी ने किया।
आज मंचित होंगे राम जन्म के दिव्य प्रसंग
समिति संयोजक डॉ. विजयप्रकाश विप्लवी ने बताया कि संस्थान अध्यक्ष वेदप्रकाश भारद्वाज और दल प्रमुख घनश्याम शर्मा के निर्देशन में 40 अनुभवी कलाकार रामकथा को मंच पर जीवंत कर रहे हैं। शनिवार, 10 अक्टूबर को रावण की कठोर तपस्या, पृथ्वी की करुण पुकार और भगवान श्रीराम के जन्म से जुड़े दिव्य प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।
रिपोर्ट: यौवन्तराज माहेश्वरी


