Thursday, September 24, 2026

उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना, ममत्व और आसक्ति के त्याग का दिया संदेश

कुचामन सिटी | शाबाश इंडिया।

दशलक्षण महापर्व के नवम दिवस गुरुवार को 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, डीडवाना रोड पर उत्तम आकिंचन्य धर्म की श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आराधना की गई। प्रातः 6:30 बजे 75 श्रावकों ने कलशाभिषेक किया। इसके बाद भगवान आदिनाथ एवं भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा का सौभाग्य विमल कुमार, मुकेश एवं अमित काला परिवार, विमलचंद, विनय एवं विकास पहाड़िया परिवार, सोहनलाल एवं मनोज कुमार काला परिवार तथा राजेश कुमार एवं मुकेश कुमार गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ।

दशलक्षण धर्म में उत्तम आकिंचन्य का विशेष महत्व बताया गया है। आकिंचन्य का अर्थ किसी वस्तु, व्यक्ति, संपत्ति, पद, मान-सम्मान अथवा सांसारिक मोह के प्रति ममत्व और आसक्ति का त्याग करना है। मनुष्य संसार में रहते हुए अनेक वस्तुओं को अपना मान लेता है और उनके प्रति मोह एवं चिंता में बंध जाता है। उत्तम आकिंचन्य धर्म यह संदेश देता है कि केवल बाहरी वस्तुओं का त्याग करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि मन के भीतर बसे ‘मेरा-तेरा’ के भाव और ममत्व को त्यागना भी आवश्यक है।

उत्तम आकिंचन्य धर्म आत्मा को बाहरी संग्रह और आंतरिक आसक्ति से मुक्त होने की प्रेरणा देता है। जब मनुष्य वस्तुओं को अपना मानने के भाव से ऊपर उठता है, तब उसके भीतर शांति, संतोष और आत्मिक निर्मलता का भाव विकसित होता है।

इस अवसर पर मंदिर में श्रावक-श्राविकाओं ने भक्तिभाव से नवदेवता पूजन, सोलह कारण पूजन, सिद्ध पूजन, दशलक्षण पूजन, दशलक्षण विधान, त्याग धर्म पूजन एवं मूलनायक भगवान महावीर पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर आराधना की और पुण्यार्जन किया।

सांयकाल आरती एवं सामायिक के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। धार्मिक अंताक्षरी में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे वातावरण भक्तिमय और आनंदमय हो गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता करते हुए धर्मलाभ एवं पुण्यार्जन किया।

रिपोर्ट: लालचन्द पहाड़िया

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