
बड़ौत (उत्तर प्रदेश) | शाबाश इंडिया।
आचार्य श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज के पावन सान्निध्य में आचार्यश्री द्वारा रचित ‘आगम-अनुयोग’ ग्रंथ पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी 12 एवं 13 सितंबर 2026 को श्री अजितनाथ सभागार, मंडी-बड़ौत में विद्वत्समाज की गरिमामयी उपस्थिति के बीच सानंद संपन्न हुई। एस.ए. यूनिवर्सिटी, नवादा (बिहार) के तत्त्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर से आए विद्वानों ने आगम के विविध आयामों पर शोधपूर्ण प्रस्तुतियां देते हुए गहन शास्त्रीय मंथन किया।
आयोजक श्री 1008 अजितनाथ दिगम्बर जैन प्राचीन मंदिर, बड़ौत की कमेटी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे विद्वानों का स्वागत एवं सम्मान किया। संगोष्ठी के निर्देशक डॉ. श्रेयांसकुमार जैन, बड़ौत तथा संयोजक इंजीनियर बहिन ऋषिका जैन, दमोह के विशेष योगदान से आयोजन संपन्न हुआ।
संगोष्ठी में विद्वानों ने जैन आगम, दर्शन, अध्यात्म, लोक-विज्ञान, कर्मसिद्धांत, ध्यान सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। शास्त्रीय प्रमाणों, आगमिक संदर्भों एवं तार्किक विवेचन के माध्यम से आगम-अनुयोग ग्रंथ के विभिन्न पक्षों और विषयगत सूक्ष्मताओं को विस्तार से स्पष्ट किया गया।
देशभर से पहुंचे विद्वानों ने प्रस्तुत किए शोध-पत्र
संगोष्ठी में डॉ. श्रेयांसकुमार जैन, बड़ौत, प्रो. नलिन के. शास्त्री, दिल्ली, प्रो. अशोक जैन, वाराणसी, ब्र. जय निशांत जैन, टीकमगढ़, डॉ. नरेंद्र जैन, टीकमगढ़, पं. विनोदकुमार जैन, रजवांस, डॉ. सुरेंद्र जैन भारती, बुरहानपुर, डॉ. अनिल जैन, जयपुर, डॉ. धर्मेंद्र जैन, जयपुर, प्रो. अनेकांत जैन, दिल्ली, डॉ. ज्योतिबाबू शास्त्री, उदयपुर, डॉ. पंकज जैन, इंदौर, डॉ. सुनील जैन ‘संचय’, ललितपुर, डॉ. आशीष जैन, शाहगढ़, डॉ. सोनल जैन, दिल्ली, डॉ. आनंद जैन, वाराणसी, डॉ. शैलेश जैन, उदयपुर, डॉ. शिखर चंद्र जैन, दिल्ली, डॉ. ज्योति जैन, खतौली, डॉ. समता मारोरा, इंदौर, डॉ. अल्पना मोदी, ग्वालियर, इंजीनियर बहिन ऋषिका जैन, दमोह तथा अरविंद तिवारी सहित अनेक स्थानीय विद्वानों एवं प्रोफेसरों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
विद्वानों ने अपने अध्ययन, शोध और विषयगत विशेषज्ञता के आधार पर आगम-अनुयोग ग्रंथ के विभिन्न पक्षों को सामने रखा। शोध-पत्रों में आगमिक संदर्भों एवं तार्किक विश्लेषण के माध्यम से विषयों की गहराई और सूक्ष्मताओं को रेखांकित किया गया।
आचार्य श्री आर्जवसागर जी ने दिया समीक्षात्मक मार्गदर्शन
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में प्रस्तुत शोध-पत्रों पर आचार्य श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज ने समीक्षात्मक एवं मार्गदर्शक उद्बोधन प्रदान किया। उन्होंने आगम-अनुयोग के अध्ययन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि आगम के मर्म को समझने के लिए केवल शब्दों का अध्ययन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पीछे निहित आध्यात्मिक भावना और अभिप्राय को समझना भी आवश्यक है। अध्ययन, मनन एवं आचरण के माध्यम से ही शास्त्र-ज्ञान की वास्तविक सार्थकता होती है।
आचार्यश्री ने देशभर से आए विद्वानों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए विद्वत् परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने तथा धर्म के संदेश को देश-विदेश तक पहुंचाने की प्रेरणा दी।
दो दिनों तक चले इस आयोजन में विद्वानों ने ‘आगम-अनुयोग’ को चारों अनुयोगों को एक सूत्र में प्रस्तुत करने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ बताया। संगोष्ठी में शास्त्र-अध्ययन, शोध, विचार-विमर्श एवं समीक्षात्मक मार्गदर्शन का समन्वय देखने को मिला। देश के विभिन्न क्षेत्रों से विद्वानों की सहभागिता ने इसे वास्तविक अर्थों में राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
समापन अवसर पर अजितनाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री प्रदीप जैन, कोषाध्यक्ष नवीन जैन सहित सभी पदाधिकारियों ने उपस्थित विद्वानों का बहुमान एवं सम्मान किया। आयोजन को सफल बनाने में श्री 1008 अजितनाथ दिगम्बर जैन प्राचीन मंदिर कमेटी, मंडी-बड़ौत का विशेष योगदान रहा।
बड़ौत की धरती पर आयोजित यह राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी देशभर के विद्वानों के ज्ञान, शोध और चिंतन को एक मंच पर लाने वाले स्मरणीय आयोजन के रूप में संपन्न हुई।


