
जयपुर | शाबाश इंडिया।
क्या खाना खाने के बाद आपको अक्सर पेट भारी लगने, सुस्ती, गैस, खट्टी डकार या सीने में जलन जैसी समस्या होती है? कई बार इसका एक कारण जरूरत से अधिक भोजन करना भी हो सकता है। बचपन से हम सुनते आए हैं कि पेट भरकर खाना चाहिए, लेकिन पेट को इतना भर लेना कि असहजता महसूस होने लगे, स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माना जाता।
आयुर्वेद में भोजन को केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि शरीर और मन के संतुलन का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान में भी बार-बार जरूरत से अधिक कैलोरी का सेवन वजन बढ़ने तथा कुछ पाचन संबंधी समस्याओं से जुड़ा माना जाता है।
जरूरत से ज्यादा खाने पर क्या हो सकता है?
एक बार में बहुत अधिक भोजन करने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है। इससे कुछ लोगों को पेट भारी लगना, देर तक पेट भरा महसूस होना, गैस या असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। भोजन बहुत अधिक या भारी होने पर खाने के बाद सुस्ती भी महसूस हो सकती है। हालांकि अत्यधिक थकान के पीछे नींद की कमी, भोजन का प्रकार या अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।
जरूरत से ज्यादा खाने से कुछ लोगों में सीने में जलन, खट्टी डकारें, पेट फूलना और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से जिन लोगों को पहले से एसिडिटी या GERD की समस्या है, उनके लिए एक बार में बहुत अधिक भोजन परेशानी बढ़ा सकता है।
बार-बार अपनी भूख से अधिक खाने पर शरीर को आवश्यकता से ज्यादा कैलोरी मिल सकती है। लंबे समय में यह वजन बढ़ने में योगदान दे सकता है और बढ़ता वजन डायबिटीज, उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोग सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को प्रभावित कर सकता है।
क्या 80 प्रतिशत पेट भरकर खाना चाहिए?
जापान की प्रसिद्ध अवधारणा ‘हारा हाची बु’ का सामान्य अर्थ पेट को पूरी तरह ठूंसकर खाने के बजाय संतुष्टि महसूस होने पर भोजन रोकना है। हालांकि इसे हर व्यक्ति के लिए बिल्कुल 80 प्रतिशत की निश्चित सीमा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि भोजन की जरूरत उम्र, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग होती है।
आयुर्वेदिक परंपरा में भी पेट को पूरी तरह भरने के बजाय भोजन और तरल पदार्थों के लिए संतुलित स्थान रखने की बात कही गई है। इसे किसी सटीक चिकित्सकीय माप के बजाय संयमित भोजन की पारंपरिक अवधारणा के रूप में समझना बेहतर है।
ज्यादा खाने की आदत कैसे कम करें?
धीरे-धीरे खाना और भोजन को अच्छी तरह चबाना उपयोगी हो सकता है। भूख मिटने और पेट को पूरी तरह ठूंसकर भरने के बीच के अंतर को समझना भी जरूरी है। भोजन करते समय मोबाइल या टीवी से दूरी बनाकर खाने पर व्यक्ति अपने भोजन और पेट की संतुष्टि के संकेतों पर बेहतर ध्यान दे सकता है।
पहली प्लेट खत्म करने के तुरंत बाद दूसरी सर्विंग लेने के बजाय कुछ समय रुकना भी मददगार हो सकता है। इससे यह समझने का अवसर मिलता है कि वास्तव में और भोजन की जरूरत है या नहीं।
स्वस्थ भोजन का अर्थ केवल यह नहीं है कि हम क्या खा रहे हैं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि कितना और कितनी तेजी से खा रहे हैं। भोजन के बाद हल्का और सहज महसूस करना, अत्यधिक भारीपन और असहजता से बेहतर संकेत हो सकता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. पीयूष त्रिवेदी के अनुसार, भोजन में संयम और शरीर की भूख-संतुष्टि के संकेतों पर ध्यान देना स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डॉ. पीयूष त्रिवेदी, आयुर्वेद विशेषज्ञ, एक्यूप्रेशर सेवा समिति, जयपुर।


