
जयपुर | शाबाश इंडिया।
श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, मंगल विहार में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर अनुष्ठान के 45वें दिन जनकपुरी के श्रद्धालुओं की सहभागिता से आयोजन श्रद्धा, वात्सल्य एवं भक्ति से सराबोर रहा। श्रमण आचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज की सुयोग्य शिष्या श्रमणी आर्यिका 105 अर्हं श्री गुरु माँ के पावन सान्निध्य में आयोजित अनुष्ठान में संघस्थ श्रमणी संस्कृत श्री माताजी एवं श्रमणी अरहन श्री माताजी का भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

अनुष्ठान का शुभारंभ मूलनायक भगवान आदिनाथ के प्रथम अभिषेक एवं गुरु माँ के श्रीमुख से बीजाक्षर युक्त शांतिधारा के साथ हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन करते हुए भक्तामर स्तोत्र का पाठ किया और भगवान के चरणों में अपनी श्रद्धा समर्पित की।
श्रेष्ठी पदम जैन बिलाला ने बताया कि पुण्यार्जक बंथली वाले पाटनी परिवार के पदम-उषा, अशोक-सजना, कमलेश-दीपा, मनोज्ञ, नितिन, सौरभ, अंकित एवं आशीष जैन सहित जनकपुरी के श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। आदित बिलाला, प्रकाश गंगवाल, सुनील सेठी, महेश काला, सोभाग अजमेरा, जिनेंद्र जैन, आशीष जैन, राजेश गर्ग सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भी धर्मलाभ प्राप्त किया।
गुरु माँ के पावन सान्निध्य में पं. अमन शास्त्री द्वारा विधि-विधानपूर्वक प्राची-मनोज्ञ पाटनी का गर्भ संस्कार कराया गया। भक्तामर स्तोत्र के श्लोकों की आध्यात्मिक महिमा का देवियों द्वारा भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया गया। वहीं लव-कुश, नारायण, नाग-नागिन आदि पात्रों द्वारा की गई धर्म प्रभावना ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अमित गोधा, मनोज जैन, विनय सोगानी, नवीन बिल्टीवाला एवं संजय जैन सहित समिति के पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। रितेश जैन ने गुरु माँ के अनन्य भक्त पदम जैन बिलाला का समाज की ओर से सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया।
पाटनी परिवार के साथ दीपिका बिलाला सहित श्रद्धालुओं को गुरु माँ के रत्नयुक्त प्रासुक जल से पाद-प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गुरु माँ के आशीर्वाद एवं पावन सान्निध्य में धर्मलाभ प्राप्त कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य अनुभव किया।
जनकपुरी के श्रद्धालुओं की सहभागिता से मंगल विहार में संपन्न यह भक्तामर अनुष्ठान श्रद्धा, भक्ति, वात्सल्य एवं धर्म प्रभावना का अनुपम संगम बन गया।


