Tuesday, September 8, 2026

कृष्ण भक्ति, लोक रंग और शौर्य परंपरा का संगम, तीन दिनों तक उत्सव में डूबा प्रताप गौरव केंद्र

उदयपुर | शाबाश इंडिया।

कहीं नन्हे कान्हा और राधा के रूप में सजे बच्चे मन मोह रहे थे, तो कहीं “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की” के जयघोष के बीच युवाओं ने मानव पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ने का रोमांच जगाया। लहरिया, झांकियां, नाव मनोरथ, भजन संध्या और मेवाड़ की पारंपरिक गवरी ने वातावरण में ऐसा रंग भरा कि प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ तीन दिनों तक मानो कृष्णमय हो उठा।

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अंतर्गत संचालित प्रताप गौरव केंद्र में 4 से 6 सितंबर तक आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला महोत्सव में भक्ति के साथ लोक संस्कृति, परंपरा और मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिला।

निदेशक अनुराग सक्सेना के अनुसार महोत्सव का शुभारंभ पंचामृत अभिषेक के साथ हुआ, जिसमें 45 जोड़ों ने भाग लिया। इसके बाद सजे मेले में खान-पान, हस्तशिल्प, धार्मिक-सामाजिक साहित्य एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं के स्टॉल लगाए गए। बच्चों के लिए लगाए गए झूले भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे।

पहले दिन आयोजित कान्हा-यशोदा वेशभूषा प्रतियोगिता में किंशु सुथार ने प्रथम, वेदिका राव ने द्वितीय और युविका श्रीमाली ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग की राधा-कृष्ण प्रतियोगिता में कृतिका, वेदिका और युविका संयुक्त रूप से प्रथम रहीं। कार्यक्रम में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा मुख्य अतिथि रहे।

शाम को आयोजित मटकी फोड़ प्रतियोगिता ने उत्सव का रोमांच बढ़ा दिया। 25 फीट ऊंची मटकी को मेवाड़ क्लब श्री एकलिंगनाथ जी टीम, कुम्हारवाड़ा की सीनियर टीम ने पांच मंजिला मानव पिरामिड बनाकर दूसरे प्रयास में एक मिनट 25 सेकंड में फोड़ दिया और 51 हजार रुपये का पुरस्कार जीता। वहीं नवाचार आधारित 18 फीट ऊंची दही-हांडी प्रतियोगिता में इसी क्लब की जूनियर टीम विजेता रही।

दूसरे दिन कृष्ण लीलाओं एवं धार्मिक-सांस्कृतिक प्रसंगों पर आधारित झांकियों ने दर्शकों को आकर्षित किया। भगवान एकलिंगनाथ सरस्वती संस्कार विद्यालय की झांकी प्रथम, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़गांव की झांकी द्वितीय तथा आलोक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की झांकी तृतीय रही।

दोपहर में आयोजित लहरिया उत्सव राजस्थानी लोक रंग से सराबोर रहा। मेहंदी प्रतियोगिता में नेहा सेन, मोनिका और कोयल श्रीमाली ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। शाम को भक्तिधाम में नाव मनोरथ के साथ भजन संध्या आयोजित हुई।

इसी दौरान थूर एवं सायरा के बच्चों ने सामाजिक विषयों तथा हाड़ी रानी के शौर्य पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर दर्शकों को प्रभावित किया। सामूहिक घूमर, तलवार रास, महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र पर योगासन एवं आत्मरक्षा प्रदर्शन ने कार्यक्रम में विविधता और ऊर्जा का संचार किया।

महोत्सव का तीसरा दिन मेवाड़ के प्रसिद्ध लोक अनुष्ठान गवरी के नाम रहा। रविवारीय अवकाश होने के कारण सुबह से ही मेले में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अभिजीत मुहूर्त में शुरू हुई गवरी में होमा, हत्यो, कालू केर, कानू-गूजरी, महाराणा प्रताप, भमरियो-भमरी, लाखा वणजारा तथा चोर-पुलिस सहित अनेक पारंपरिक प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया।

हवालाखुर्द के गवरी दल में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के जनरल फिजिशियन डॉ. गणेश कुरिया की सहभागिता विशेष आकर्षण रही। समापन अवसर पर गवरी साधकों का पारंपरिक पेरावणी के साथ अभिनंदन किया गया।

तीन दिनों तक चले इस महोत्सव ने कृष्ण भक्ति के साथ मेवाड़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक चेतना, शौर्य गाथाओं और सामूहिक उत्सवधर्मिता को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

खबर/फोटो: यौवंतराज माहेश्वरी

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