लक्षणों को नजरअंदाज न करें, गंभीर संकेत दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें

उदयपुर | शाबाश इंडिया।
डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्यतः संक्रमित एडीज एजिप्टी मादा मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर दिन के समय, विशेषकर सुबह और शाम के आसपास अधिक सक्रिय रहता है। डेंगू सामान्यतः सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित मच्छर के काटने से वायरस दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है।
कैसे फैलता है डेंगू
जब कोई एडीज मच्छर डेंगू से संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो वायरस मच्छर के शरीर में पहुंच जाता है। यही संक्रमित मच्छर किसी दूसरे व्यक्ति को काटता है तो वायरस उसके शरीर में पहुंच सकता है। घरों और आसपास जमा साफ पानी, जैसे कूलर, गमले, पुराने टायर, बाल्टी और खुली पानी की टंकियां एडीज मच्छरों के प्रजनन का स्थान बन सकती हैं।
प्रमुख लक्षण
संक्रमित मच्छर के काटने के लगभग 4 से 10 दिन बाद लक्षण शुरू हो सकते हैं। सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, कमजोरी एवं थकान, जी मिचलाना या उल्टी तथा त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल हैं। कुछ मामलों में ग्रंथियों में सूजन भी हो सकती है।
गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत
बुखार कम होने के बाद भी मरीज की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी या मल में खून दिखाई देना, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी या सुस्ती, त्वचा का ठंडा या पीला पड़ना तथा अत्यधिक प्यास लगना जैसे लक्षण गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।
जांच में चिकित्सकीय सलाह जरूरी
केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की निश्चित पहचान हमेशा संभव नहीं होती। चिकित्सक बीमारी की अवधि और मरीज की स्थिति के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं। इनमें सीबीसी और प्लेटलेट काउंट की निगरानी तथा शुरुआती दिनों में एनएस-1 एंटीजन जैसी जांच शामिल हो सकती है। आवश्यकता के अनुसार अन्य जांच भी कराई जा सकती हैं।
केवल प्लेटलेट काउंट के आधार पर डेंगू की गंभीरता तय नहीं की जाती। मरीज की सामान्य स्थिति, रक्तस्राव, रक्तचाप, पेशाब की मात्रा और अन्य चिकित्सकीय संकेतों को भी ध्यान में रखा जाता है।
बचाव के लिए अपनाएं सावधानी
घर और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से खाली कर साफ करें। पानी की टंकियों को ढककर रखें। गमले, पुराने टायर, डिब्बे और अन्य बर्तनों में पानी जमा न होने दें। दिन में भी मच्छरों से बचाव करें और जहां संभव हो शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। मच्छरदानी, खिड़की-दरवाजों की स्क्रीन तथा उपयुक्त मच्छररोधी साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
डेंगू से संक्रमित व्यक्ति को भी मच्छरों से बचाना जरूरी है, ताकि मच्छर वायरस को आगे दूसरे लोगों तक न पहुंचा सकें।
उपचार में लापरवाही न करें
डेंगू के लिए ऐसी विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है जो सामान्य रूप से वायरस को समाप्त कर दे। उपचार मुख्यतः सहायक होता है, जिसमें पर्याप्त आराम, तरल पदार्थों का सेवन और चिकित्सकीय निगरानी महत्वपूर्ण हैं। बुखार और दर्द के लिए दवा केवल चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही लें। ऐसी दवाओं से बचना चाहिए जो रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
होम्योपैथी को मुख्य उपचार का विकल्प न बनाएं
डेंगू को ठीक करने या गंभीर डेंगू को रोकने में होम्योपैथिक दवाओं की प्रभावशीलता के समर्थन में विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए डेंगू के मामले में होम्योपैथी को चिकित्सकीय जांच, आवश्यक तरल प्रबंधन या अस्पताल की देखभाल का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति होम्योपैथिक उपचार लेना चाहता है तो योग्य चिकित्सक की निगरानी में इसे केवल सहायक रूप में लिया जाना चाहिए तथा डेंगू की नियमित चिकित्सकीय निगरानी जारी रखनी चाहिए।
तेज बुखार के साथ पेट दर्द, लगातार उल्टी, रक्तस्राव, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू या किसी वैकल्पिक उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तत्काल चिकित्सा सहायता लें।


