
भीलवाड़ा | शाबाश इंडिया।
राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जीवन में समस्याएं कितनी भी बड़ी क्यों न हों, उनसे कभी हार नहीं माननी चाहिए। जब तक जिंदगी पर पूर्ण विराम नहीं लगता, तब तक संघर्ष जारी रखना चाहिए। बुरे दिनों के बाद अच्छे दिन जरूर आते हैं। जो वृक्ष पतझड़ देख लेता है, उसी के जीवन में सावन आता है। उन्होंने कहा कि भगवान भी उसी की मदद करते हैं, जो अपनी मदद स्वयं करना जानता है।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास के दौरान श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर, शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में सोमवार को प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जब कभी लगे कि जीवन में बहुत समस्याएं हैं, तो अपने आसपास के लोगों की जिंदगी पर नजर डालें। तब महसूस होगा कि हमारे सामने मौजूद समस्याएं कितनी छोटी हैं और दुनिया में कई लोग ऐसी सुविधाओं से भी वंचित हैं, जो हमें प्राप्त हैं। दूसरों का दुख देखने से अपना दुख छोटा महसूस होने लगता है। इसलिए जो मिला है, उसका आनंद लेना सीखना चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि आलस्य के पंख उखाड़कर मजबूती की चोंच लगा लें तो जीवन आनंदमय बन सकता है। हमारे पास जो नहीं है, उसके लिए हताश होने के बजाय जो उपलब्ध है, उसकी कद्र करनी चाहिए। दुनिया में ऐसे अनेक लोग हैं, जो हमारे जैसा जीवन जीने की भी प्रार्थना करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी अन्य व्यक्ति जैसा बनने का प्रयास न करें, बल्कि जैसे हैं, उसी में प्रसन्न रहने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि समस्याएं स्वयं मजबूत नहीं होतीं, बल्कि हमारे निर्णय उन्हें मजबूत बनाते हैं। जीवन में हर पल समस्याएं बनी रहती हैं। इनमें कुछ हमारी अपनी होती हैं, लेकिन अधिकतर समस्याएं दूसरों की होती हैं, जिन्हें हम अपना बना लेते हैं। दूसरों की समस्याओं को अपना बनाना बंद कर दें तो हमारी 80 प्रतिशत समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद मानव जीवन मिला है। इसे दूसरों की समस्याओं में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। हम अपनी समस्या का समाधान निकाल सकते हैं, लेकिन दूसरों की समस्याओं को अपना बना लेने से उनका समाधान संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि हम धन्यवाद और शिकायत लिखना शुरू करें तो शिकायतें दो-चार पंक्तियों में समाप्त हो जाएंगी, लेकिन धन्यवाद लिखने के लिए पूरी कॉपी भी कम पड़ जाएगी।
उन्होंने कहा कि जो मिला है उसे खोने का प्रयास नहीं करें और जो है, उसी में सुखी रहने की कला सीखें। रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हैं तो अनावश्यक चिंता क्यों करनी? हमारी टेंशन का बड़ा कारण हम स्वयं नहीं, बल्कि दूसरे लोग और उनकी समस्याएं होती हैं।
आचार्यश्री ने कहा कि जिंदगी कितनी लंबी जी, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि जिंदगी को किस तरह जिया। महापुरुष हों या साधारण इंसान, समय सभी के पास बराबर होता है। हम उस समय का किस प्रकार उपयोग करते हैं, यही हमारे जीवन का परिणाम तय करता है।
प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य अनिल कुमार-मनीष-साहिल अजमेरा परिवार को प्राप्त हुआ। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया। ज्ञानवती महिला मंडल की सदस्यों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान गंगा महोत्सव में प्रवचन सुनने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे।
ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन जारी रहेंगे।


