
भीलवाड़ा | शाबाश इंडिया।
भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्रसंत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि आज परिवारों में दिलों की दूरियां बढ़ने से रिश्तों में दीवारें खड़ी हो रही हैं। सहनशीलता कम हो रही है और भावनात्मक संबंध कमजोर पड़ रहे हैं। सर्वसुविधायुक्त जीवन के बावजूद लोग सुख-शांति के लिए तरस रहे हैं। यदि घर में शांति नहीं है तो व्यक्ति दुनिया की कितनी भी तीर्थयात्राएं कर ले, उसे वास्तविक शांति नहीं मिल सकती।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मेन सेक्टर, शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में गुरुवार को परिवार की एकता विषय पर प्रवचन देते हुए आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिंदगी में सब कुछ कर लेना, लेकिन अपने भाई को कभी नाराज मत करना। भाई के प्रति मन में प्रेम कभी समाप्त नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि माता-पिता को बुढ़ापे में गरीबी या दरिद्रता उतना दुख नहीं देती, जितना बेटों का अलग-अलग रहना उन्हें पीड़ा देता है। बच्चों का एक साथ प्रेमपूर्वक रहना माता-पिता के लिए सबसे बड़ा सुख है। दोस्त और पड़ोसी के साथ रह सकते हैं तो दो भाई साथ क्यों नहीं रह सकते। जिन घरों में भाइयों के बीच प्रेम नहीं होता, उस घर को बिखरने में देर नहीं लगती।
आचार्यश्री ने कहा कि रामायण और महाभारत काल से लेकर आज तक देखा जाए तो खतरा हमेशा परायों से नहीं, कई बार अपनों से ही होता है। बाहरी व्यक्ति जितना नुकसान नहीं कर सकता, उतना कभी-कभी अपने ही कर देते हैं। इसलिए अपनों को कभी दूर नहीं होने देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाई-भाई का रिश्ता रावण-विभीषण या बाली-सुग्रीव जैसा नहीं, बल्कि राम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्न जैसा होना चाहिए, जिसमें एक भाई दूसरे भाई के लिए त्याग और समर्पण का आदर्श प्रस्तुत करे। भाई गलत भी हो तो उसका साथ छोड़ने के बजाय उसे समझाने का प्रयास करना चाहिए। अलग होना आसान है, लेकिन दोबारा जुड़ना कठिन होता है।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि बढ़ते एकल परिवारों के कारण रिश्तों की माला बिखर रही है, लेकिन आज भी कई संयुक्त परिवार तीर्थ के समान हैं, जहां दर्जनों सदस्य प्रेमपूर्वक एक साथ रहते हैं और एक ही चौके में भोजन करते हैं। जहां भाइयों में प्रेम होता है, उन घरों में प्रतिदिन त्योहार जैसा वातावरण रहता है। पैसा भले कम हो जाए, लेकिन हृदय का प्रेम कभी कम नहीं होना चाहिए। बुरे समय में पैसा नहीं, बल्कि अपना प्रेम और व्यवहार काम आता है।
जैन एकता का संदेश देने का आह्वान
आचार्य पुलकसागर महाराज ने मंच से आह्वान किया कि आने वाली संवत्सरी या क्षमावाणी के अवसर पर सकल जैन समाज के चारों सम्प्रदायों के संत एक मंच पर बैठकर दुनिया को जैन एकता का संदेश दें। उन्होंने कहा कि यदि हम यहां एक मंच पर नहीं बैठ पाएंगे तो सिद्ध शिला पर एक साथ कैसे बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे मतभेदों और अहंकार को छोड़कर एक साथ बैठने की आवश्यकता है। वितरागी बनने का प्रयास करने वाले हम लोग छोटे-छोटे अहंकार नहीं छोड़ पाते। संत एक साथ बैठेंगे तो समाज भी एक साथ बैठ जाएगा। संतों के एक हुए बिना समाज की एकता भी पूर्ण नहीं हो सकती।
आचार्यश्री ने स्पष्ट किया कि सभी सम्प्रदायों के संतों को एक मंच पर लाने के संबंध में अभी कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। चातुर्मास समिति इस विषय पर चर्चा कर आगे निर्णय करेगी।
उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर परिवार बिखर जाते हैं और भाई-भाई की लड़ाई कई जन्मों का बैर बना सकती है। मनुष्य किसी को क्षमा कर सकता है, लेकिन कर्मों से परमात्मा भी मुक्त नहीं कर सकते। कर्मों का फल राजा और रंक सभी को भोगना पड़ता है। इसलिए परिवार में प्रेम, क्षमा और संयम का भाव बनाए रखना चाहिए।
मकान बड़े, लेकिन मन छोटे होते जा रहे
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि रिश्तों की पकड़ ढीली होने से परिवार बिखर रहे हैं। आज व्यक्ति पड़ोसी के सुख को भी सहजता से स्वीकार नहीं कर पाता। मकान और गाड़ी से व्यक्ति का स्टेटस तय किया जाने लगा है। हमें याद रखना चाहिए कि व्यक्ति तन से नहीं, मन से बड़ा होता है। दुर्भाग्य यह है कि हमारे मकान बड़े होते जा रहे हैं, लेकिन मन छोटे होते जा रहे हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य गुलाबचंद-मनीष-नीरज शाह परिवार ने प्राप्त किया। ग्वालियर से आए प्रतिष्ठाचार्य पंडित चन्द्रप्रकाश चन्द्र ने भी आचार्यश्री को श्रीफल भेंट किया।
अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया। केसरकुंज महिला मंडल की सदस्यों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
ज्ञान गंगा महोत्सव में उमड़ रहा सर्व समाज
ज्ञान गंगा महोत्सव में आचार्य पुलकसागर महाराज की वाणी सुनने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंच रहे हैं। महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन आयोजित होंगे।


