जयपुर। शाबाश इंडिया।

महावीर इंटरनेशनल एपेक्स की ई-चौपाल के 219वें एपिसोड में “बुजुर्ग क्या करें, जिनके बच्चे विदेश में हैं या दूसरे शहरों में नौकरी करते हैं?” विषय पर सार्थक एवं सकारात्मक चर्चा आयोजित की गई। इंटरनेशनल डायरेक्टर (नॉलेज शेयरिंग एवं ई-चौपाल) अजीत कोठिया के संयोजन में आयोजित वेबिनार में देशभर से 22 प्रबुद्ध वक्ताओं ने भाग लिया।
वेबिनार में वक्ताओं ने माना कि बदलते समय में रोजगार और करियर के कारण नई पीढ़ी का घर से दूर रहना सामान्य बात है। ऐसे में बुजुर्गों को अपनी अपेक्षाओं को सीमित रखते हुए सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए और बच्चों से अत्यधिक आशाएं रखने से बचना चाहिए।
वक्ताओं ने सुझाव दिया कि माता-पिता वर्ष में एक-दो बार बच्चों के पास जाकर समय बिताएं तथा बच्चों को भी तीज-त्योहार और अन्य अवसरों पर माता-पिता से मिलने आते रहना चाहिए। दोनों पीढ़ियों के बीच प्रेम, संवाद और संतुलित व्यवहार बनाए रखने से पारिवारिक संबंध मजबूत रहेंगे। बच्चों पर अपने साथ रहने का दबाव बनाने के बजाय ऐसा स्नेहपूर्ण वातावरण बनाया जाए कि वे स्वयं अपने परिवार के साथ माता-पिता से मिलने आते रहें।
चर्चा के दौरान सुमेर सिंह कर्णावत, प्रदीप टोंग्या, चंद्रा रांका, संजय बेद, सुनीता जम्मार, भुवनेश्वरी मालोंत, अजीत कोठिया, नीलू जैन, विजया चौधरी, राजलक्ष्मी भंडारी, हंसा हिंगड़ तथा पुष्पा चिंडालिया (सिलीगुड़ी) ने अपने विचार साझा किए।
वेबिनार में महावीर इंटरनेशनल का वरिष्ठ नागरिक क्लब गठित करने का भी सुझाव सामने आया, जिसे भविष्य में मूर्त रूप देने पर सहमति बनी। वहीं संजय बेद ने बुजुर्गों की देखभाल के लिए ‘टाइम बैंक’ की अवधारणा प्रस्तुत की। इसके तहत सेवा के इच्छुक लोगों का समय पंजीकृत कर आवश्यकता पड़ने पर बुजुर्गों की सहायता में उपयोग करने का प्रस्ताव रखा गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आरती मूंड की प्रार्थना से हुआ। नीलू जैन ने आभार व्यक्त किया। ई-चौपाल में अशोक कुमार चोपड़ा, डॉ. एन.एस. नरुका, महेश मूंड, सरोज सालगिया, सुशील छाजेड़, करुणा गर्ग सहित अनेक सदस्यों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन अजीत कोठिया ने किया।


