मारोठ (नावा सिटी)। शाबाश इंडिया।

परम पूज्य आचार्य गुरुवर 108 वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का मारोठ में भव्य मंगल प्रवेश मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में धर्ममय माहौल देखने को मिला तथा हजारों श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा एवं धर्मसभा में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
आचार्य श्री के मंगल प्रवेश के साथ विशाल कलश यात्रा एवं शोभायात्रा निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मध्वज, मंगल कलश और बैंड-बाजों के साथ शामिल हुए। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंगल प्रवेश के उपरांत आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री ने अहिंसा, संयम, सेवा, करुणा और जीवदया के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि मूक प्राणियों की रक्षा ही सच्चे धर्म की पहचान है। उन्होंने मारोठ जैन समाज द्वारा संचालित जीव दया पालक समिति (बकरशाला) की सराहना करते हुए इसे अनुकरणीय सेवा कार्य बताया।

आचार्य श्री ने मारोठ स्थित चारों जैन मंदिरों के दर्शन कर उन्हें अतिशयकारी एवं तीर्थ समान बताते हुए कहा कि इन मंदिरों के दर्शन से तीर्थ यात्रा जैसा पुण्य प्राप्त होता है। उनके इस संदेश से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
धर्मसभा में चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट, पाद प्रक्षालन एवं महाआरती का आयोजन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भक्ति एवं अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रवचन सुनकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
इस अवसर पर सीकर, जयपुर, कुचामन, नावा सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन को लेकर पूरे मारोठ में उत्सव जैसा वातावरण रहा। महिलाओं ने मंगलगीतों से वातावरण को भक्तिमय बनाया, जबकि युवाओं ने व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।
मारोठ जैन मुनि सेवा समिति के अनुसार विभिन्न धार्मिक क्रियाओं का सौभाग्य श्रद्धालु परिवारों को प्राप्त हुआ। यह भव्य आयोजन आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम बनकर मारोठ को धर्मनगरी के रूप में नई पहचान देने वाला साबित हुआ।


