मुरैना (मनोज जैन नायक) विक्रम संवत् 2083 में दो ज्येष्ठ माह है अर्थात ज्येष्ठ 60 दिनों का महीना है। ज्येष्ठ अधिक मास होने से 17 मई से 15 जून तक विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं होगें ।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि चन्द्र माह से और सूर्य माह से एक वर्ष के दिनों में अंतर रहता है। चन्द्र मास के गणित से एक वर्ष में 354 दिन 09 घंटे और सूर्य मास के वर्ष में 365 दिन 06 घंटे होते है । इसलिए हर ढाई वर्ष बाद, यानि 32 माह 16 दिन एक घंटा 34 मिनट बीतने पर अधिक मास आता है।
वर्ष में जिस महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती उसे अधिक मास कहते हैं।
डॉ. जैन के अनुसार प्रथम ज्येष्ठ मास 02 मई से 31 मई तक चलेगा। दूसरा ज्येष्ठ मास 01 जून से 29 जून तक चलेगा । इस प्रकार इस बार ज्येष्ठ का महीना 02 मई से 29 जून तक 60 दिनों का होगा।
इसमें प्रथम ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा रविवार दिनांक 17 मई से द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या सोमवार दिनांक 15 जून 2026 तक ज्येष्ठ अधिक मास विवाह, गृह प्रवेश जैसे कार्य नहीं होंगे।
कब कब दो ज्येष्ठ माह बने- सन् 1942, सन 1961, सन् 1980, सन् 1988, सन् 1999, सन् 2007, सन् 2018, सन् 2026, सन् 2037, सन 2045 में दो ज्येष्ठ माह रहेंगे ।
इस समय 17 मई से 15 जून तक विवाह, ग्रह प्रवेश आदि का पूरी तरह कोई मुहूर्त नहीं है।
इस महीने का धार्मिक बहुत महत्व है। इसलिए धार्मिक कार्य दान पुण्य अधिक होंगे।
इस महीने में सूर्य अपनी पूरी शक्ति में रहता है । दिन बड़े होते हैं । इसलिए पृथ्वी पर सूर्य की किरणें ज्यादा समय तक रहने से पृथ्वी तवे के समान तपने लगती हैं । भीषण गर्मी , पानी की कमी, पशु पक्षियों को जल न मिलने से उनकी हालत खराब होती हैं। इसलिए इन दिनों में जल दान, सत्तू दान, पशु पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था, प्याऊ लगवाना सबसे अधिक नेक और पुण्य का काम कहलाता है।
इस वर्ष केवल 18 विवाह मुहूर्त बचे हैं-
जून – 19, 20, 22, 23, 26, 27, 29
जुलाई – 06, 07, 11,
नवंबर- 21, 24, 25, 26 दिसंबर -02, 03, 11, 12
दो ज्येष्ठ अधिक मास में 17 मई से 15 जून तक नहीं होगें शुभ कार्य


