सुखाड़िया विश्व विद्यालय के दृश्य कला विभाग में चार दिनी कला प्रदर्शनी में झलका उल्लास
उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय की आर्ट गैलरी में कदम रखते ही ऐसा लगा जैसे किसी रंगों से भरे जीवंत संसार में प्रवेश कर लिया हो। दीवारों पर टंगी हर कृति अपनी अलग कहानी कह रही थी और गैलरी में मौजूद सन्नाटा भी जैसे इन कहानियों को सुनने में मग्न था।
सोमवार शाम यहां शुरू हुई वार्षिक कला प्रदर्शनी महज एक आयोजन नहीं, बल्कि युवा कलाकारों की भावनाओं, संघर्ष और सपनों का सजीव दस्तावेज बनकर सामने आई।
जैसे-जैसे आगे बढ़ते गए, रंगों और रेखाओं का संसार और गहराता गया। कहीं कैनवास पर उकेरी गई प्रकृति अपनी खोती सुंदरता का दर्द बयान कर रही थी, तो कहीं चारकोल स्केच मानव मन की उलझनों को बेहद संवेदनशील तरीके से सामने रख रहे थे। क्ले मॉडल्स और इंस्टॉलेशन आर्ट ने आधुनिक प्रयोगों की झलक दिखाई, जो यह साबित कर रहे थे कि नई पीढ़ी केवल परंपराओं तक सीमित नहीं, बल्कि नए आयाम गढ़ने में भी विश्वास रखती है।
गैलरी में मौजूद हर कृति के सामने कुछ देर ठहरना पड़ता था, ऐसा लगता था मानो वे केवल देखने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए बनी थीं। एक कोने में कुछ विद्यार्थी अपनी पेंटिंग्स के पास खड़े होकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं जानने को उत्सुक दिखे, तो दूसरी ओर कला प्रेमी हर रचना के साथ संवाद करते नजर आए। करीब 150 से अधिक कृतियों में समाज के अंतर्विरोध, प्रकृति के प्रति चिंता और भविष्य की उम्मीदें साफ झलक रही थीं।
उद्घाटन करते मुख्य अतिथि डॉ. अश्विन एम. दलवी और वरिष्ठ कलाकार प्रो. सुरेश शर्मा सहित उपस्थित सभी कलाकारों ने स्टूडेंट्स का उत्साह यह कहते बढ़ाया कि कला को केवल दीवारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे समाज के हर वर्ग तक सहज रूप से पहुंचना चाहिए।
प्रदर्शनी का अलग आकर्षक ‘माय ड्रीम’ पेंटिंग थीम रही, जहां बच्चों और युवाओं ने अपने सपनों की दुनिया को रंगों में ढालकर ऐसी कृतियों में बदल दिया जिनमें कहीं स्वच्छ और हरित भविष्य की झलक थी, तो कुछ में सामाजिक समानता का संदेश।
पुरस्कार पाकर हर्षित हुए युवा
इस प्रतियोगिता में भाविका बंसल प्रथम, आद्विक वशिष्ठ द्वितीय और माही गुप्ता तृतीय स्थान पर रहे। वहीं, वैष्णवी पालीवाल, दर्श जैन और भाविक जारोली को सांत्वना पुरस्कार देकर उनके प्रयासों को सराहा गया।
प्रदर्शनी के दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य उभरते कलाकारों को एक सशक्त मंच देना और आमजन को समकालीन कला से जोड़ना है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों की पूरे वर्ष की मेहनत का परिणाम है, जिसमें एक साधारण दर्शक भी कला के गहरे अर्थों को समझ सकता है।
गैलरी से बाहर निकलते हुए ऐसा महसूस हुआ कि यह प्रदर्शनी केवल कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सोचने और महसूस करने की एक नई दृष्टि देकर जाती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो यहां हर रंग एक सवाल है और हर कृति एक उम्मीद।
कुल मिलाकर, यह प्रदर्शनी सिर्फ एक कला आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों, उनकी सोच और बेहतर दुनिया की तलाश का सजीव दस्तावेज नजर आई।
रिपोर्ट/फोटो राकेश शर्मा ‘राजदीप’


