आचार्य सुंदर सागर महाराज आज भूगर्भ से निकालेंगे अतिशयकारी प्राचीन जिनबिंब — पांच दिवसीय महामस्तकाभिषेक महोत्सव में उमड़ेंगे श्रद्धालु
जयपुर, 22 अप्रैल।
सांगानेर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, ठोलियान में आचार्य सुंदर सागर महाराज, आचार्य शशांक सागर महाराज एवं गणिनी आर्यिका नंदीश्वर मति माताजी ससंघ के सानिध्य में आयोजित वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को जयकारों के बीच जिनबिंबों को नवीन वेदी में विराजमान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
गुरुवार, 23 अप्रैल को आचार्य संघ के सानिध्य में भूगर्भ स्थित जिनबिंबों को चैत्यालय से निकालकर मंदिर में दर्शनार्थ विराजमान किया जाएगा। इसके साथ ही पांच दिवसीय अतिशय युक्त जिनबिंबों के दर्शन एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव का शुभारंभ होगा।
अध्यक्ष अशोक चांदवाड़ एवं महामंत्री राजीव ठोलिया ने बताया कि वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव एवं शिखर पर कलश स्थापना समारोह के अंतर्गत बुधवार को प्रतिष्ठाचार्य पं. सनत कुमार जैन के निर्देशन में प्रातः अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात सौधर्म इंद्र नवीन-सपना बिल्टीवाला के नेतृत्व में पूजा एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया गया। मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति दी गई।
मुख्य संयोजक प्रदीप ठोलिया ने बताया कि मालपुरा परिवार द्वारा नवीन वेदी में जिनबिंबों को विराजमान किया गया। इसके पश्चात मंदिर के शिखरों पर मंत्रोच्चार के साथ कलश एवं ध्वजा स्थापना की गई। मूलनायक शांतिनाथ भगवान के शिखर पर कमल किशोर पहाड़िया एवं महिपा बाकलीवाल ने कलश स्थापना की, जबकि विमला देवी, नरेंद्र एवं मीनू सोगानी ने ध्वजा स्थापना का पुण्य लाभ प्राप्त किया।
धर्मसभा में मंगलाचरण के बाद समाज श्रेष्ठि हेमचंद-नीलू जैन द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। नवीन-सपना, अमन-आयुषी जैन बिल्टीवाला तथा मालपुरा परिवार द्वारा आचार्य सुंदर सागर एवं आचार्य शशांक सागर महाराज का पाद प्रक्षालन किया गया। जिनवाणी भेंट के पश्चात चित्रकूट, सांगानेर, चौमूं, मानसरोवर आदि स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने पूर्वाचार्यों के चरणों में अर्घ्य अर्पित किए।
आचार्य सुंदर सागर महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि तलघर में विराजमान जिनबिंबों के दर्शन एवं पूजा देवों द्वारा भी की जाती है। उन्होंने कहा कि बाहुबली में 12 वर्ष बाद महामस्तकाभिषेक होता है, जबकि यहां तीन वर्ष बाद ही श्रद्धालुओं को यह दुर्लभ अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भूगर्भ में 127 जिन प्रतिमाएं विराजमान हैं, जिन्हें 3 वर्ष 3 माह के अंतराल के बाद बाहर निकाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “दान से पुण्य की प्राप्ति होती है, अन्यथा संचित धन निष्प्रयोज्य हो जाता है।” साथ ही उन्होंने बताया कि पंच परमेष्ठी के सानिध्य में भूगर्भ से जिनबिंबों को निकलते देखना अत्यंत सौभाग्य की बात है।
सायंकाल महाआरती, आगम आधारित शंका समाधान एवं भक्ति संध्या का आयोजन भी किया गया, जिसमें भजनों की मनोहारी प्रस्तुतियां दी गईं।
23 अप्रैल से महामस्तकाभिषेक महोत्सव
राजस्थान जैन सभा, जयपुर के उपाध्यक्ष विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि 23 अप्रैल को प्रातः 8:00 बजे भूगर्भ से निकाले गए जिनबिंबों का महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा होगी, जिसके पश्चात धर्मसभा आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम में मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन, जिनवाणी भेंट एवं प्रवचन होंगे।
सायंकाल 7:00 बजे महाआरती, शंका समाधान एवं भक्ति संध्या आयोजित की जाएगी। यह अतिशय युक्त जिनबिंबों के दर्शन एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव 27 अप्रैल तक चलेगा।
इस अवसर पर विजय प्रकाश ठोलिया, अरुण ठोलिया, कुशल ठोलिया, अनिल ठोलिया, राजीव ठोलिया, प्रकाश ठोलिया, सुरेश ठोलिया, प्रदीप ठोलिया, योगेश टोडरका, सौभाग्यमल जैन, मीनू सोगानी, आशीष पाटनी सहित अनेक गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
— विनोद जैन कोटखावदा


