
लाडनूं | शाबाश इंडिया।
केंद्रीय विधि मंत्री एवं कुलाधिपति अर्जुनराम मेघवाल और कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने आचार्यश्री को भेंट की पुस्तक, ‘अहिंसा विमर्श’ का भी हुआ विमोचन
जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के 35 वर्षों के इतिहास, विकास यात्रा और उपलब्धियों को समेटे पुस्तक ‘उत्कर्ष’ का लोकार्पण सुधर्मा सभा में अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के पावन सान्निध्य में किया गया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल तथा कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने पुस्तक की प्रतियां आचार्यश्री को भेंट कीं।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने बताया कि आचार्यश्री तुलसी के स्वप्न के अनुरूप इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। आज विश्वविद्यालय अपने अनुशास्ताओं के आशीर्वाद और मार्गदर्शन में उस स्वप्न को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ‘उत्कर्ष’ में विश्वविद्यालय की स्थापना की सोच से लेकर वर्तमान स्थिति तक की विकास यात्रा का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है। इसमें स्थापना के 35 वर्षों के दौरान रहे सभी कुलाधिपतियों और कुलपतियों के कार्यकाल का विवरण समाहित है। पुस्तक विश्वविद्यालय की मूल अवधारणा और उसके अनुरूप प्रगति की यात्रा को रेखांकित करती है।
भारत की आध्यात्मिक ज्ञान संपदा सबसे बड़ी पूंजी : मेघवाल
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री तथा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अर्जुनराम मेघवाल ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत के अनेक मानदंड हो सकते हैं, जिनमें आध्यात्मिक शक्ति भी एक महत्वपूर्ण आधार है। यह शक्ति आचार्यश्री जैसे महापुरुषों के मार्गदर्शन से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक ज्ञान संपदा देश की सबसे बड़ी पूंजी है और इसी के आधार पर भारत विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
‘अहिंसा विमर्श’ पुस्तक का भी हुआ लोकार्पण
समारोह में समणी सत्यप्रज्ञा द्वारा लिखित पुस्तक ‘अहिंसा विमर्श’ का भी आचार्यश्री महाश्रमण के समक्ष लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर समणी सत्यप्रज्ञा ने पुस्तक के संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। आचार्यश्री ने दोनों पुस्तकों के लिए मंगल प्रेरणा प्रदान की।
कार्यक्रम में अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण ने पावन पाथेय प्रदान किया। युवाचार्यश्री महावीरकुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इससे पूर्व विश्वविद्यालय परिसर पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री एवं कुलाधिपति अर्जुनराम मेघवाल का कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने स्वागत किया।
इस प्रकार ‘उत्कर्ष’ पुस्तक के माध्यम से जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की साढ़े तीन दशक की शैक्षणिक, आध्यात्मिक और संस्थागत यात्रा को दस्तावेजी स्वरूप मिला।


