Saturday, October 10, 2026

कैमरे की नजर से निकला रंगों का जादू, मोहन पटेल की चित्रात्मक फोटोग्राफी में जीवंत हुआ कल्पनाओं का संसार

उदयपुर | शाबाश इंडिया।

कहीं रंगों की अठखेलियां, कहीं रोशनी और परछाइयों की जुगलबंदी। कहीं आकृतियां अपनी खामोशी में कुछ कहती नजर आती हैं, तो कहीं साधारण दृश्य कल्पनाओं के पंख लगाकर असाधारण बन जाते हैं। पहली नजर में खूबसूरत पेंटिंग का अहसास कराने वाली ये कलाकृतियां दरअसल कैमरे की आंख से रची गई तस्वीरें हैं। उदयपुर की ऐतिहासिक बागोर की हवेली में इन दिनों ऐसा ही दिलचस्प और कल्पनाशील संसार साकार हुआ है।

गणगौर घाट स्थित बागोर की हवेली में वरिष्ठ कलाकार एवं फोटोग्राफर मोहन पटेल की सातवीं चित्रात्मक फोटोग्राफी प्रदर्शनी का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। गुजरात ललित कला अकादमी के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी, कलाकार एवं फोटोग्राफर दिनेश कोठारी तथा वरिष्ठ फोटो पत्रकार राकेश शर्मा ‘राजदीप’ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर योगाचार्य सुरेश पालीवाल, डॉ. सुनील निमावत, महेंद्र सिंह गहलोत और सौरभ शर्मा सहित अनेक कलाप्रेमी उपस्थित रहे।

जब तस्वीरों में घुल गए चित्रकला के रंग

प्रदर्शनी में प्रदर्शित छायाचित्र पारंपरिक फोटोग्राफी से अलग अपनी विशिष्ट दृश्यात्मक शैली के कारण दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। प्रकाश, छाया, रंगों के संयोजन और कलात्मक संरचनाओं के माध्यम से ऐसी अनुभूतियां उभरती हैं, जो तस्वीर और पेंटिंग के बीच की दूरी को मिटाती प्रतीत होती हैं।

मोहन पटेल की रचनात्मक दृष्टि की खासियत यह है कि वे कैमरे से केवल सामने मौजूद दृश्य को दर्ज नहीं करते, बल्कि उसमें छिपे सौंदर्य और कल्पनाओं को नया आकार देते हैं। उनकी तस्वीरों में यथार्थ और कल्पना का अनूठा मेल दर्शकों को दृश्य के भीतर उतरकर उसके अलग-अलग अर्थ तलाशने के लिए प्रेरित करता है।

ड्रॉइंग से डिजिटल अभिव्यक्ति तक कला का सफर

पांच दशक से अधिक समय से कला साधना में सक्रिय मोहन पटेल ने वर्ष 1968 में माध्यमिक शिक्षा के बाद अहमदाबाद के सी.एन. कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स से कमर्शियल आर्ट में डिप्लोमा प्राप्त किया। ड्रॉइंग, पेंटिंग और डिजाइन की शिक्षा ने उनकी सृजनात्मक यात्रा को मजबूत आधार दिया।

अहमदाबाद के शिल्पी डिजाइन स्टूडियो से करियर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने कैडिला फार्मास्यूटिकल्स, शिल्पी एडवरटाइजिंग, मुद्रा कम्युनिकेशंस और वाइब्रेंट एडवरटाइजिंग में लगभग तीन दशक तक कलाकार, विजुअलाइजर एवं आर्ट डायरेक्टर के रूप में कार्य किया। उनकी कलाकृतियां राष्ट्रीय प्रदर्शनियों के साथ तत्कालीन यूगोस्लाविया के जाग्रेब सैलून जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भी पहुंच चुकी हैं।

प्रदर्शनी 10 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। कला प्रेमियों के लिए यह आयोजन फोटोग्राफी की उस अनूठी दुनिया को करीब से देखने का अवसर है, जहां कैमरा केवल तस्वीरें नहीं खींचता, बल्कि रंगों, रोशनी और संवेदनाओं से दृश्य कविताएं रचता है।

रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’

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