
साखना | शाबाश इंडिया।
शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र साखना में बुधवार को भगवान शांतिनाथ, चंद्रप्रभु, पार्श्वनाथ एवं शीतलनाथ भगवान का विधि-विधान के साथ महामस्तकाभिषेक किया गया। क्षीरसागर से लाए गए जल से अभिषेक के बाद श्रद्धालुओं ने घी, दूध, दही, चंदन, केसर, सर्वऔषधि, फलरस एवं इक्षुरस आदि से भगवान शांतिनाथ का पंचामृत अभिषेक किया। इस अवसर पर राकेश, भागचंद, राजेश, पंकज, सुनील, पवन, बंटी, बाहुबली, प्रकाश, मनीष सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रकाश सोनी ने बताया कि अभिषेक के बाद पंडित रोविल शास्त्री के पावन सानिध्य में 108 रिद्धि मंत्रों के उच्चारण के बीच पुण्यार्जक परिवारों के नाम वाचन के साथ भगवान शांतिनाथ की वृहद शांतिधारा की गई। इसके बाद भगवान शांतिनाथ, पार्श्वनाथ, शीतलनाथ एवं चंद्रप्रभु भगवान की पूजा-अर्चना कर अर्घ्य एवं श्रीफल समर्पित किए गए।
प्रबंध समिति के मंत्री प्यारचंद जैन ने बताया कि दोपहर में शांति मंडल विधान का आयोजन हुआ। इसमें आचार्य निमंत्रण, मंडप शुद्धि, सकलीकरण आदि धार्मिक क्रियाएं पूरी करने के बाद पांच मंगल कलश स्थापित किए गए। सुसज्जित वेशभूषा में माला-मुकुट धारण किए इंद्र-इंद्राणियों ने विधि-विधान से भगवान को 128 अर्घ्य एवं श्रीफल समर्पित किए। मोना, अंतिमा, ज्योति, टीना, सृष्टि, परी, आरव, दीपक, नवल, पर्व, अक्षत सहित श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किए। संगीत की मधुर ध्वनियों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा और वातावरण भक्तिमय हो गया।
प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष मनीष बज ने बताया कि सायंकाल भगवान शांतिनाथ की 48 रजत दीपकों से महाआरती की गई। इसके साथ ही णमोकार महामंत्र का जाप किया गया।
मीडिया प्रभारी राजेश अरिहंत ने बताया कि इससे पूर्व मंगलवार को टोडारायसिंह से 90 श्रद्धालुओं की विशाल पदयात्रा अतिशय क्षेत्र साखना के लिए रवाना हुई। पदयात्रियों ने मार्ग में भजन गाते हुए और हाथों में पंचरंगी ध्वज थामे भक्ति की। सायंकाल अतिशय क्षेत्र पहुंचकर श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ के दर्शन किए और जयकारे लगाए। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी हुआ।
प्रबंध समिति के मंत्री प्यारचंद जैन ने बताया कि अतिशय क्षेत्र साखना में 453वां वार्षिक उत्सव, मेला, कलशाभिषेक समारोह एवं विशाल रथयात्रा का आयोजन 25 और 26 अक्टूबर को किया जाएगा। मेले की व्यवस्थाओं एवं आयोजन की तैयारियों को लेकर 8 अक्टूबर को अतिशय क्षेत्र में बैठक आयोजित की जाएगी। समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया।


