Friday, September 18, 2026

गणगौर घाट पर जीवंत हुई दिवेर की विजयगाथा

उदयपुर | शाबाश इंडिया।

पिछोला की लहरों और ऐतिहासिक गणगौर घाट की विरासत के बीच गुरुवार शाम मेवाड़ के शौर्य का एक अध्याय जीवंत हो उठा। महाराणा प्रताप और मेवाड़ी वीरों की दिवेर विजय पर आधारित नुक्कड़ नाटक के पहले सार्वजनिक मंचन में युवा कलाकारों ने युद्ध की घटनाओं, संघर्ष और स्वाभिमान को प्रभावी अभिनय के जरिए प्रस्तुत किया। प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ की ओर से ‘दिवेर विजय महोत्सव-2026’ के तहत आयोजित यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए इतिहास से रूबरू होने का माध्यम बनी।

“जैसा कि होता आया है, अब वैसा ना होने देंगे, लाज बचाई थी जिसने, हम उनको ना खोने देंगे…” जैसे ही कलाकारों का यह स्वर गणगौर घाट पर गूंजा, आसपास मौजूद लोग मंचन की ओर आकर्षित होते चले गए।

नाटक में दिवेर स्थित मुगल चौकी पर महाराणा प्रताप के आक्रमण, कुंवर अमर सिंह की युद्धभूमि में भूमिका और मेवाड़ी योद्धाओं के साहस को घटनाक्रम के साथ प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति का उद्देश्य ऐतिहासिक शूरवीरों की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ उन्हें वर्तमान संदर्भों से जोड़ना भी रहा।

मीरा गर्ल्स कॉलेज और विद्या भवन पॉलिटेक्निक कॉलेज के विद्यार्थियों ने नाटक को जीवंत बनाया। अमित श्रीमाली और अमित व्यास के लेखन-निर्देशन में मीमांसा परसाई, रंजन कुमार साहनी, जलज भारद्वाज, मानवी ऑडिच्या, नीतू अहारी, अर्चना साहनी, अंजना सुथार, हंसा मीणा, निशा बंजारा, दर्शिका वैष्णव और नकुल पंड्या ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं।

दिवेर विजय महोत्सव के तहत प्रदेश के विभिन्न संभागों में आयोजित भाषण प्रतियोगिताओं में भी विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप के रणकौशल, प्रशासनिक क्षमता और दिवेर युद्ध के ऐतिहासिक महत्व पर अपने विचार रखे।

उदयपुर के राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय में एनएसएस के तत्वावधान में आयोजित संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में जागृति जागेटिया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। एसएमबी महाविद्यालय नाथद्वारा के हिमांशु आसेरी और श्री गोविंद गुरु राजकीय महाविद्यालय, बांसवाड़ा की स्पर्शी जैन संयुक्त रूप से द्वितीय रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या प्रो. अंजना गौतम ने की। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के पूर्व समन्वयक विलास जानवे तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के डिप्टी डायरेक्टर गौरीकान्त शर्मा विशिष्ट अतिथि रहे।

प्रताप गौरव केंद्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने इतिहासकार ओझा के लेखन का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की विजय से संबंधित ऐतिहासिक संदर्भ पहले से उपलब्ध हैं और इस विषय को तथ्यपरक ढंग से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।

बीकानेर के राजकीय डूंगर महाविद्यालय में ‘विजय योद्धा एवं कुशल प्रशासक के रूप में महाराणा प्रताप’ विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में 11 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें निखिल चौधरी ने प्रथम, संजू कंवर ने द्वितीय और नेहरू मेमोरियल कॉलेज, हनुमानगढ़ के कृष ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. नरेंद्र नाथ ने की। प्रो. विक्रमजीत विशिष्ट अतिथि तथा महोत्सव संयोजक रमन कुमार सूद मुख्य अतिथि रहे। संयोजन प्रो. सुखाराम ने किया।

संभागीय प्रतियोगिताओं में चयनित प्रतिभागी अब राज्य स्तरीय भाषण प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’

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