Friday, August 21, 2026

जेब में कैमरा, नजर में कहानी: छात्राओं ने सीखे मोबाइल फोटोग्राफी के प्रोफेशनल गुर

जयपुर | शाबाश इंडिया।

गांधी सर्कल स्थित राजकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज, जयपुर में कॉमर्शियल आर्ट विभाग की छात्राओं एवं स्टाफ के लिए एक दिवसीय फोटोग्राफी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में तस्वीर को केवल दृश्य के रूप में नहीं, बल्कि एक कहानी के रूप में देखने की कला पर विशेष जोर दिया गया।

उदयपुर से आए वरिष्ठ फोटो पत्रकार राकेश शर्मा ‘राजदीप’ ने छात्राओं को फोटोग्राफी की बारीकियां समझाते हुए कहा कि प्रभावशाली तस्वीर केवल महंगे कैमरे से नहीं, बल्कि संवेदनशील नजर और सही क्षण को पहचानने की क्षमता से बनती है।

उन्होंने प्रकाश की दिशा, सही एंगल, फ्रेमिंग, कम्पोजिशन, विषय एवं पृष्ठभूमि के बीच संबंध को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी में तकनीक के साथ-साथ सही समय पर सही दृश्य को पहचानना भी बेहद महत्वपूर्ण है।

कॉलेज प्रिंसिपल शालिनी गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला का सबसे रोचक हिस्सा ऑन-द-स्पॉट मोबाइल फोटोग्राफी रहा। राजदीप ने विद्यार्थियों को बताया कि आज स्मार्टफोन केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि जेब में मौजूद एक सक्षम कैमरा भी है। थोड़ी समझ और नियमित अभ्यास से मोबाइल से भी प्रभावशाली एवं प्रोफेशनल तस्वीरें बनाई जा सकती हैं।

छात्राओं ने फोकस, एक्सपोजर, प्राकृतिक प्रकाश, पोर्ट्रेट मोड, मोबाइल कैमरा सेटिंग्स, स्टोरीटेलिंग तथा बेसिक फोटो एडिटिंग से जुड़े व्यावहारिक गुर सीखे।

सीखी गई तकनीकों को तुरंत आजमाने के लिए ऑन-द-स्पॉट फोटो कॉन्टेस्ट भी आयोजित किया गया, जिसने कार्यशाला में उत्साह और बढ़ा दिया। छात्राओं ने कॉलेज परिसर एवं आसपास के सामान्य दृश्यों में नए फ्रेम, भाव और कहानियां तलाशीं।

प्रतियोगिता में ‘ग्रुप शटर स्क्वाड’ ने प्रथम, ‘मस्ती का तूफान’ ने द्वितीय तथा ‘चिक क्लिक्स’ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं ‘जस्ट चिल’ और ‘सीडीडीएम’ को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।

इस दौरान विभागाध्यक्ष संजुक्ता, डॉ. सुरेंद्र सोनी, वरिष्ठ प्रवक्ता महेश चंद्र शर्मा, अनुराग व्यास, नीतिका बागपतिया, रीता पुरोहित सहित अन्य विभागीय सदस्यों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यशाला का संदेश स्पष्ट रहा कि एक अच्छी तस्वीर के लिए महंगा कैमरा जरूरी नहीं है। इसके लिए जागरूक आंख, संवेदनशील मन और उस खास क्षण को पहचानने की कला जरूरी है, जिसे अक्सर बाकी दुनिया अनदेखा कर देती है।

रिपोर्ट/फोटो : डॉ. सुरेंद्र सोनी

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