मुरैना। शाबाश इंडिया

इस विवाह सीजन का आखिरी विवाह मुहूर्त आज 11 जुलाई शनिवार को रहेगा। इसके बाद चार माह तक विवाह, नवीन गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा सहित अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। 22 जुलाई को भड़ली नवमी तिथि पर बिना पंचांग मुहूर्त के अबूझ मुहूर्त की लोकाचार परंपरा के अनुसार शुभ कार्य किए जा सकेंगे।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद हिमांशु जैन ने बताया कि पंचांग के अनुसार 11 जुलाई का मुहूर्त इस वर्ष के विवाह आयोजनों के लिए अंतिम मुहूर्त है। इसके बाद सीधे नवंबर माह में विवाह के शुभ मुहूर्त प्रारंभ होंगे। नवंबर में 21, 24, 25 और 26 तारीख तथा दिसंबर में 2, 3, 11 और 12 तारीख को विवाह मुहूर्त रहेंगे।
उन्होंने बताया कि विभिन्न ज्योतिषीय कारणों से विवाह सहित मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। गुरु तारा 16 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया गुरुवार को पश्चिम दिशा में अस्त होगा, जो 9 अगस्त श्रावण कृष्ण एकादशी रविवार को पूर्व दिशा में उदय होगा। गुरु अस्त काल, अस्त से तीन दिन पूर्व का वृद्धत्व काल तथा उदय के तीन दिन बाद तक का बाल्यकाल विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।
इसके अलावा 25 जुलाई आषाढ़ शुक्ल एकादशी से 20 नवंबर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक हरिशयन काल रहेगा। इस अवधि में विशेष परंपराओं वाले कुछ क्षेत्रों को छोड़कर सामान्य रूप से विवाह मुहूर्त नहीं रहेंगे।
डॉ. जैन ने बताया कि 26 सितंबर भाद्रपद पूर्णिमा से 10 अक्टूबर आश्विन अमावस्या तक महालय श्राद्ध पक्ष होने के कारण विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे।
उन्होंने बताया कि 14 अक्टूबर को शुक्र तारा पश्चिम दिशा में अस्त होगा, जो 28 अक्टूबर को पूर्व दिशा में उदय होगा। शुक्र तारा अस्त होने से तीन दिन पूर्व और उदय के तीन दिन बाद तक विवाह सहित शुभ कार्यों पर रोक रहेगी।
इसी प्रकार 16 सितंबर से 14 जनवरी 2027 तक धनु मलमास रहेगा। धनु राशि में सूर्य के रहने वाले इस पौष मलमास काल में भी विवाह आदि मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया है।


