Friday, July 10, 2026

मां अहिल्या की धर्मनगरी इंदौर में दो महान संतों के आगमन का शुभ संयोग, वर्षायोग को लेकर जैन समाज में उत्साह

इंदौर। शाबाश इंडिया

मां अहिल्या की धर्मनगरी इंदौर इस वर्ष दो महान दिगंबर जैन संतों की कृपा दृष्टि से धन्य होने जा रही है। एक ओर अकलिकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महामुनिराज ससंघ का 12 जुलाई को भव्य मंगल प्रवेश प्रस्तावित है, वहीं श्रमण संस्कृति के महान निर्यापक मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महामुनिराज ससंघ का वर्ष 2026 का वर्षायोग भी इंदौर में होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इस संभावना से सकल जैन समाज में हर्ष और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण है।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन ‘दद्दू’ ने बताया कि आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के मंगल प्रवेश से इंदौर की धर्मभूमि पुनः तप, त्याग और वीतराग वाणी से अनुप्राणित होगी। समाज के इंद्र वीणा सेठी के अनुसार आचार्य श्री के ससंघ सान्निध्य में धर्मसभाएं, प्रवचन एवं विभिन्न धार्मिक-साधना कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

वहीं दिगंबर जैन समाज सामाजिक सांसद के नेतृत्वकर्ता आनंद नवीन गोधा, हर्ष जैन, विजय पाटोदी, एम.के. जैन, आकाश कोल, अक्षय कासलीवाल, राहुल जैन स्पोर्ट्स तथा राजेश जैन ‘दद्दू’ से प्राप्त जानकारी के अनुसार परम पूज्य निर्यापक मुनि पुंगव 108 सुधासागर जी महाराज ससंघ का वर्ष 2026 का वर्षायोग इंदौर में होने की संभावना अत्यंत प्रबल हो गई है। यदि यह वर्षायोग इंदौर में आयोजित होता है तो यह केवल शहर ही नहीं, बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक आध्यात्मिक अवसर होगा।

समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज अपने ओजस्वी प्रवचनों, राष्ट्र चेतना, जिनशासन प्रभावना और समाज जागरण के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। उनके चातुर्मास के दौरान आत्मजागरण, संस्कार निर्माण और धर्म प्रभावना से जुड़े अनेक विराट आयोजन संपन्न होते हैं।

इंदौर की सकल दिगंबर जैन समाज ने सभी समाजों एवं धर्मप्रेमी नागरिकों से संतों के आगमन की तैयारियों में तन, मन और धन से सहयोग देने की अपील की है। समाज ने अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने तथा बच्चों और युवाओं को संत सान्निध्य से जोड़ने का आह्वान किया है।

समाजजनों का कहना है कि इंदौर ने संतों को आमंत्रित करने का दायित्व सफलतापूर्वक निभाया है। अब समय है कि मालवा की इस पुण्यभूमि को धर्म, साधना और संस्कारों का सशक्त केंद्र बनाया जाए।

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