Wednesday, July 8, 2026

विश्व शांति और सुख-समृद्धि की कामना से संघीजी मंदिर में हुआ श्री शांतिनाथ पूजा विधान, मंडल पर चढ़ाए 121 अर्घ्य

जयपुर। शाबाश इंडिया।

“शांति करो सब जगत में, वृषभादिक जिनराज…” की मंगल ध्वनि के बीच सांगानेर स्थित श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर संघीजी में प्रदेश की खुशहाली, विश्व शांति एवं सुख-समृद्धि की कामना को लेकर श्री 1008 शांतिनाथ पूजा विधान का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर समाजसेवी विनोद-दीपिका जैन कोटखावदा के नेतृत्व में संगीतमय पूजा-अर्चना की गई। अष्ट द्रव्य के साथ मंडल पर इंद्र-इंद्राणियों द्वारा श्रीफल सहित अर्घ्य समर्पित किए गए। पूजा विधान के दौरान मंडल पर कुल 121 अर्घ्य चढ़ाए गए।

अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि मंगलाष्टक एवं अभिषेक पाठ के साथ सूर्य नगर तारों की कूंट निवासी विनोद जैन ‘कोटखावदा’, मनीष बगड़ा, अमित पाटनी, अंकित सोनी, शुभम हल्दैनिया और अनिल ठोलिया ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान शांतिनाथ का अभिषेक किया। इसके बाद देश, प्रदेश एवं विश्व में शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हुए वृहद शांतिधारा की गई।

कार्यक्रम में मंगल कलश स्थापना एवं दीप प्रज्वलन मैना देवी कासलीवाल, मुन्ना देवी वैद, विनोद-दीपिका जैन कोटखावदा, मनीष-संतोष बगड़ा, अंकित-दिव्या बाकलीवाल तथा शुभम-तन्वी जैन द्वारा किया गया। इसके बाद नव देवता एवं भगवान आदिनाथ की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना की गई।

पंडित नवीन जैन के निर्देशन में गायिका सृष्टि जैन एंड पार्टी द्वारा मधुर भजनों के बीच श्री 1008 शांतिनाथ मंडल विधान संपन्न कराया गया। इस दौरान सौधर्म इंद्र विनोद जैन कोटखावदा, अशोक बाकलीवाल, मनीष बगड़ा, अमित पाटनी, अनिल ठोलिया, ज्ञानचंद सोगानी, नरेंद्र पांडेया, अंकित बाकलीवाल, भागचंद पाटनी, भागचंद पहाड़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

भक्तिमय वातावरण में मैना देवी कासलीवाल, मुन्ना देवी वैद, दीपिका जैन कोटखावदा, प्रेमलता बाकलीवाल, पुष्पा सोनी, सुनीता हल्दैनिया, अंजना बाकलीवाल, संतोष बगड़ा, दिव्या बाकलीवाल, रेखा पाटनी, शर्मिला पहाड़िया, सुमन ठोलिया, तन्वी जैन, देवांश बाकलीवाल सहित इंद्र-इंद्राणियों ने भजनों पर भक्ति नृत्य प्रस्तुत किए।

पूजा विधान के दौरान चारों वलयों में क्रमशः 8, 16, 32 एवं 64 अर्घ्य समर्पित किए गए। शांतिनाथ विधान के पूर्ण अर्घ्य एवं समुच्चय महाअर्घ के साथ पूजा संपन्न हुई। अंत में 108 दीपों से भगवान शांतिनाथ एवं पंच परमेष्ठी की भक्तिमय महाआरती की गई।

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