गुना | शाबाश इंडिया।

जिले के प्रमुख जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र पुण्योदय तीर्थ, बजरंगगढ़ में आयोजित पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव के तहत दीक्षा कल्याणक समारोह में निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने क्षुल्लक श्री सुधीरसागर जी महाराज को ऐलक दीक्षा प्रदान की। दीक्षा के दौरान श्रद्धालुओं की जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
दीक्षा संस्कार से पूर्व प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच भगवान का विधि-विधान से पूजन एवं दीक्षा संस्कार संपन्न कराया गया। समारोह में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं ने दीक्षा कल्याणक मनाया।
मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि यह एक वर्ष से भी कम समय में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज द्वारा प्रदान की गई तीसरी जैनेश्वरी दीक्षा है। इससे पहले उन्होंने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में एक साथ 14 ऐलक दीक्षाएं प्रदान की थीं। इसके बाद पंचकल्याणक महोत्सव के प्रथम चरण में ऐलक सुमंगलसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक शुभमसागर जी महाराज को दीक्षा दी थी।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान पंचम काल दुखमय है। इस काल में व्यक्ति को यदि दुख नहीं भी हो, तो भी भविष्य में दुख आने का भय बना रहता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति को बीमारी का, वाहन में यात्रा कर रहे व्यक्ति को दुर्घटना का तथा अमीर व्यक्ति को संपत्ति लुटने का डर हमेशा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन अनिश्चित है। कब हंसी दुख में बदल जाए और कब कौन साथ छोड़ दे, यह कोई नहीं जानता। ऐसे में मनुष्य को अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए धर्म और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलना चाहिए।
मुनि श्री ने कहा कि कर्मभूमि को प्रकृति का ऐसा वरदान मिला है, जहां मनुष्य अपने श्रेष्ठ कर्मों से अमर इतिहास बना सकता है। रत्नत्रय का पालन जीवन को उज्ज्वल बनाता है और दीक्षा उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है, जो व्यक्ति को पूज्य बनने की ओर अग्रसर करता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वर्तमान युग की चुनौतियों के बीच धर्म, संयम और सदाचार को जीवन का आधार बनाकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ें।


