Friday, May 15, 2026

मेदांता हॉस्पिटल पटना ने भारत के पहले स्वदेशी माइट्रल क्लिप (MyClip) में बड़ी सफलता हासिल की

गंभीर हृदय और किडनी की बीमारी से जूझ रही 76 वर्षीय मरीज़ को मिली नई ज़िंदगी

पटना, 15 मई 2026 : मेदांता हॉस्पिटल, पटना ने एक 76 वर्षीय महिला का सफलतापूर्वक इलाज किया है, जो गंभीर किडनी की बीमारी, एनीमिया और हृदय की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। इस इलाज के लिए भारत में ही विकसित पहले माइट्रल क्लिप डिवाइस—MyClip का इस्तेमाल किया गया। यह भारत में हृदय रोगों के उन्नत इलाज को ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने और उसे किफ़ायती बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

तीन सालों से, मरीज़ को सांस लेने में गंभीर तकलीफ़, पैरों में सूजन और बहुत ज़्यादा थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा, । उन्हें ‘गंभीर माइट्रल रीगर्जिटेशन’ (MR) की बीमारी का पता चला,यह हृदय के वाल्व से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय के अंदर रक्त पीछे की ओर लीक होने लगता है, जिससे लक्षण और भी गंभीर हो जाते हैं और ‘हार्ट फेलियर’ का खतरा बढ़ जाता है।

ओपन-हार्ट सर्जरी या हृदय प्रत्यारोपण (हार्ट ट्रांसप्लांट) जैसे पारंपरिक इलाज के विकल्प बहुत ज़्यादा जोखिम भरे थे, और मरीज़ की उम्र तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए इन पर विचार नहीं किया गया। केवल दवाओं से ही उनका इलाज संभव नहीं था।

मेदांता, पटना में जीवन बदलने वाली प्रक्रिया
“डॉ. प्रवीण चंद्रा (चेयरमैन इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी कार्डियक केयर मेदांता गुरुग्राम) “ने कहा ,भारत में विकसित MyClip जैसी उन्नत तकनीकें देश के हेल्थकेयर सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होंगी। अब अत्याधुनिक कार्डियक उपचार केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अधिक से अधिक मरीजों को किफायती और विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध हो सकेगा। मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं के माध्यम से मरीजों की रिकवरी तेज़ होती है, जोखिम कम होता है और उनकी जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आता है। मेदांता का उद्देश्य हमेशा से मरीजों तक सबसे आधुनिक और सुलभ उपचार पहुँचाना रहा है, और MyClip उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

“डॉ. प्रमोद कुमार (निदेशक – HOD कार्डियोलॉजी)” और डॉ. अजय कुमार सिन्हा (निदेशक – क्लिनिकल प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी) ने मिलकर ‘MyClip ‘ प्रक्रिया को अंजाम दिया। यह एक ‘मिनिमली इनवेसिव’ (कम चीर-फाड़ वाली) प्रक्रिया थी। इसमें ओपन-हार्ट सर्जरी की कोई ज़रूरत नहीं पड़ी; इसके बजाय, रक्त वाहिका (नस) के रास्ते एक छोटी सी नली डालकर डिवाइस को हृदय में स्थापित किया गया। इस प्रक्रिया के बाद मरीज़ के लक्षणों में ज़बरदस्त सुधार देखने को मिला—अब वह अपने रोज़मर्रा के कामों को आसानी से कर पा रही हैं और अपनी ज़िंदगी का आनंद ले रही हैं।

डॉ. अजय कुमार सिन्हा ने बताया कि अब तक, भारत में केवल अमेरिका में बने माइट्रल क्लिप ही उपलब्ध थे, लेकिन उनकी ज़्यादा कीमत के कारण वे ज़्यादातर मरीज़ों की पहुँच से बाहर थे। हाल ही में, भारतीय कंपनी Meril Life Sciences ने ज़रूरी मंज़ूरी मिलने के बाद, देश में ही विकसित MyClip को लॉन्च किया। मेदांता अस्पताल, पटना में MyClip डिवाइस की उपलब्धता यह सुनिश्चित करती है कि ज़्यादा से ज़्यादा मरीज़, आयातित डिवाइसों की बहुत ज़्यादा कीमत चुकाए बिना, आधुनिक हृदय उपचार का लाभ उठा सकें।
डॉ. प्रमोद कुमार ने ज़िक्र किया कि यह सफलता की कहानी दिखाती है कि कैसे मेदांता-पटना जैसे अग्रणी अस्पतालों और Meril Life Sciences जैसी नई सोच वाली भारतीय कंपनियों के बीच सहयोग, भारत में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में क्रांति ला रहा है। सरकारी सहयोग से, विश्व-स्तरीय उपचार अब पहले से कहीं ज़्यादा भारतीयों की पहुँच में हैं।

“मेक इन इंडिया” पहल की बदौलत, Meril Life Sciences नामक एक भारतीय मेडिकल डिवाइस कंपनी ने, मेडिकल सर्टिफिकेशन बोर्ड से ज़रूरी मंज़ूरी मिलने के बाद, हाल ही में ‘ MyClip ‘ माइट्रल वाल्व रिपेयर डिवाइस लॉन्च किया है। इससे पहले, केवल आयातित (विदेशों से मंगाए गए) डिवाइस ही उपलब्ध थे, जो ज़्यादातर भारतीयों की पहुँच से बाहर थे।

भारत में लगभग 15 लाख लोग ‘गंभीर माइट्रल रीगर्जिटेशन’ की समस्या से जूझ रहे हैं, जिनमें से ज़्यादातर लोग बुज़ुर्ग हैं और उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी कई अन्य जटिल समस्याएँ भी हैं। अकेले बिहार राज्य में ही हज़ारों लोग ऐसी ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और उनके पास इलाज के सीमित विकल्प ही उपलब्ध हैं।

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