
फैक्ट्री, कारखानों और दूर-दराज के व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए दिन में पूजन का विशेष मुहूर्त
मुरैना (शाबाश इंडिया)। दीपावली पर्व की तैयारियां नवरात्रि के बाद से ही शुरू हो जाती हैं। घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सजाने-संवारने का कार्य बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति की कामना रहती है कि दीपावली पर विधि-विधान और शुभ मुहूर्त में महालक्ष्मीजी का पूजन कर उनके आशीर्वाद से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे तथा व्यापार में निरंतर उन्नति हो।
महालक्ष्मी पूजन के लिए सही और श्रेष्ठ मुहूर्त मिलने से श्रद्धालुओं को विशेष संतोष एवं प्रसन्नता होती है। इस संबंध में वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि दूर-दराज स्थित व्यापारिक प्रतिष्ठानों, फैक्ट्रियों एवं कारखानों में काम करने वाले व्यापारी शाम को पूजन के लिए नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में उन्हें दिन में ही शुभ मुहूर्त के अनुसार महालक्ष्मी पूजन कर लेना चाहिए। महालक्ष्मीजी का पूजन अत्यंत सरल है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पारंपरिक पूजा पद्धति के अनुसार स्वयं भी श्रद्धा और भक्तिभाव से पूजन करना चाहिए।
दीपावली पर बही-खाता, कलम-दवात एवं दीपक पूजन तथा दूर-दराज के व्यापारिक प्रतिष्ठानों, फैक्ट्रियों और कारखानों के लिए मुहूर्त
रविवार, 8 नवंबर
चौघड़िया के अनुसार शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं—
- चर चौघड़िया: प्रातः 8:01 से 9:22 बजे तक।
- लाभ चौघड़िया: प्रातः 9:22 से 10:43 बजे तक।
- अमृत चौघड़िया: प्रातः 10:43 से दोपहर 12:05 बजे तक।
- शुभ चौघड़िया: दोपहर 1:26 से 2:47 बजे तक।
लाभ एवं अमृत चौघड़िया के साथ अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा। दूर-दराज के व्यापारिक प्रतिष्ठानों, संस्थानों, फैक्ट्रियों एवं कारखानों में पूजन के लिए इसे विशेष श्रेष्ठ मुहूर्त बताया गया है। इसके अतिरिक्त दोपहर 1:26 से 2:47 बजे तक का शुभ चौघड़िया भी पूजन के लिए अनुकूल रहेगा।
घरों, आसपास के बाजारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त
इंजीनियर हिमांशु जैन ज्योतिषाचार्य ने बताया कि घरों तथा आसपास के बाजारों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों में महालक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोषकाल और गोधूलि बेला का विशेष महत्व है। पूजन के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं—
- प्रदोषकाल एवं गोधूलि बेला: शाम 5:31 से रात्रि 8:09 बजे तक।
- वृषभ स्थिर लग्न: शाम 5:54 से 7:50 बजे तक। शुभ एवं अमृत चौघड़िया के साथ प्रदोषकाल युक्त यह समय महालक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त है।
- महानिशीथकाल: रात्रि 11:39 से 12:31 बजे तक।
- सिंह स्थिर लग्न एवं महानिशीथकाल: रात्रि 12:24 से 2:39 बजे तक।
उन्होंने बताया कि जो श्रद्धालु महालक्ष्मी पूजन के बाद रात्रि में विशेष साधना करना चाहते हैं, उन्हें अपने गुरु द्वारा बताए गए विधि-विधान के अनुसार सिंह स्थिर लग्न एवं महानिशीथकाल में साधना करनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, दीपावली पर शुभ मुहूर्त में श्रद्धा, विश्वास और विधि-विधान के साथ महालक्ष्मी पूजन करना धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। इस अवसर पर श्रद्धालु परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना करते हैं।


