
जयपुर (शाबाश इंडिया)। श्री धन्वंतरि सेवा समिति, जौहरी बाजार की ओर से प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान श्री धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस पर पूजा-अर्चना एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मान्यता के अनुसार भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। उन्हें आयुर्वेद एवं चिकित्सा का देवता माना जाता है।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष वीरेन्द्र राणा ने बताया कि समाज द्वारा प्रदान की गई सामग्री एवं प्रबंधन की व्यवस्थाओं के माध्यम से समिति गरीब और जरूरतमंद लोगों सहित सभी वर्गों के लोगों को निःशुल्क औषधियां एवं चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाती है। भगवान धन्वंतरि की प्रेरणा से समिति समय-समय पर निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन भी करती है। इन शिविरों में विभिन्न प्रकार के रोगों के उपचार की सुविधा प्रदान की जाती है।
उन्होंने बताया कि समिति के सभी पदाधिकारी एवं प्रबंधन से जुड़े सदस्य सेवा भावना के साथ कार्य करते हैं। जोड़ों का दर्द, गठिया, सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, मधुमेह, स्त्री रोग सहित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने बताया कि श्री धन्वंतरि सेवा समिति, श्री धन्वंतरि औषधालय एवं श्री धन्वंतरि भेषज निर्माणशाला द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली औषधियों का निर्माण किया जाता है। गुणवत्तापूर्ण औषधियों एवं निरंतर जनसेवा के कारण यह औषधालय अपनी अलग पहचान बना चुका है।
कार्यक्रम के दौरान एक्यूप्रेशर एवं आयुर्वेद मर्म चिकित्सक डॉ. पीयूष त्रिवेदी को सम्मानित किया गया। समिति के अध्यक्ष वीरेन्द्र राणा ने उन्हें शॉल एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान डॉ. त्रिवेदी ने श्री धन्वंतरि औषधालय द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की तथा यहां निर्मित औषधियों की गुणवत्ता की प्रशंसा की।
इस अवसर पर संस्था के प्रबंधन से जुड़े कैलाश कुमार अग्रवाल, राम धन अत्तार, महावीर गर्ग, प्रो. श्रीनिवास शर्मा, डॉ. राजेश चतुर्वेदी, डॉ. गुप्तेश गुप्ता, केदारनाथ शर्मा, शिव शंकर गौड़ एवं रामदयाल चौधरी सहित संस्था के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अच्छे चिकित्सकों को शॉल एवं भगवान धन्वंतरि का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का समापन समिति के अध्यक्ष वीरेन्द्र राणा ने किया।


