
जयपुर | शाबाश इंडिया।
भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को आत्मसात करते हुए युवा गायक यशवर्धन सिंह यादव शास्त्रीय, उप-शास्त्रीय और सुगम संगीत का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रहे हैं। अपनी मधुर आवाज, सुरों की शुद्धता और विविध संगीत शैलियों पर पकड़ के दम पर वे संगीत जगत में विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। ग्वालियर घराने की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका, अपनी गुरु मां एवं दादी प्रोफेसर सुमन यादव के सान्निध्य में वे पिछले 10 वर्षों से गुरु-शिष्य परंपरा के तहत हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गहन शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत की गंभीरता के साथ सुगम संगीत की मिठास भी सुनने को मिलती है।
‘आज आनंद भयो’ और ‘उड़ती चली बूंदें’ को मिली सराहना
हाल ही में प्रोफेसर सुमन यादव के मार्गदर्शन में यशवर्धन का नया शास्त्रीय एल्बम ‘आज आनंद भयो’ रिलीज हुआ है। राग सरस्वती पर आधारित इस एल्बम की स्वर रचना और बंदिश के बोल स्वयं प्रोफेसर सुमन यादव ने तैयार किए हैं। वहीं, उनका सुगम संगीत एल्बम ‘उड़ती चली बूंदें’ भी श्रोताओं के बीच सराहना प्राप्त कर चुका है, जिसकी धुन उनके पिता विक्रम यादव ने तैयार की है।
यशवर्धन की प्रतिभा को वर्ष 2026 में एक और उपलब्धि मिली, जब उन्होंने आईआईआईएम (IIIM) द्वारा आयोजित अंतर-महाविद्यालय गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि उनकी संगीत साधना और निरंतर आगे बढ़ने की लगन को दर्शाती है।
मंच पर ग़ज़लों और सदाबहार गीतों से बांधा समां
यशवर्धन ने विभिन्न मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया है। इको डेरा रिसॉर्ट में आयोजित एकल ग़ज़ल प्रस्तुति के दौरान उन्होंने उस्ताद गुलाम अली की ग़ज़ल ‘वोही पलकों का झपकना’ और हरिहरन की प्रसिद्ध ग़ज़ल ‘लोग कहते हैं अजनबी तुम हो’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में उन्होंने मोहम्मद रफी के सदाबहार गीत ‘अजहुँ न आए बालमा’, ‘तुम जो मिल गए हो’ और ‘हुई शाम उनका ख्याल आ गया’ प्रस्तुत कर अपनी गायकी की छाप छोड़ी। इसके साथ ही अरिजीत सिंह के ‘लाल इश्क’ और किशोर कुमार के ‘हाल क्या है दिलों का’ जैसे अलग-अलग अंदाज के गीतों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी इन प्रस्तुतियों को संगीत प्रेमियों की सराहना मिली।
भजनों के माध्यम से सामाजिक-सांस्कृतिक जुड़ाव
संगीत के साथ यशवर्धन सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। जाजम फाउंडेशन और सिकोईडिकोन एनजीओ के मंच पर उन्होंने अपनी गुरु मां के मार्गदर्शन में मनमोहक भजनों की प्रस्तुतियां दी हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने संगीत को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामाजिक जुड़ाव का माध्यम बनाया।
शास्त्रीय संगीत की साधना, ग़ज़लों की संवेदनशीलता, सुगम संगीत की मधुरता और भजनों की आध्यात्मिकता—इन विविध विधाओं में यशवर्धन की सक्रियता उनकी संगीत यात्रा को बहुआयामी बनाती है। गुरु मां प्रोफेसर सुमन यादव से प्राप्त प्रशिक्षण और परिवार से मिले संगीत संस्कारों के सहारे वे संगीत की इस समृद्ध विरासत को समर्पण और निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत हैं।


