Saturday, August 22, 2026

अर्टिकेरिया: अचानक होने वाली पित्ती के लक्षण, कारण और बचाव

अर्टिकेरिया त्वचा की एक सामान्य स्थिति है, जिसमें अचानक लाल या त्वचा के रंग के उभरे हुए चकत्ते (पित्ती) निकलते हैं। इनमें खुजली या जलन हो सकती है। एक चकत्ता सामान्यतः कुछ घंटों में गायब होकर शरीर के किसी दूसरे हिस्से में दिखाई दे सकता है। कभी-कभी त्वचा की गहरी परत में सूजन भी हो सकती है, जिसे एंजियोएडेमा कहा जाता है।

प्रमुख लक्षण:

  • तेज खुजली और जलन होना।
  • लाल या गुलाबी, उभरे हुए चकत्ते होना।
  • चकत्तों का आकार छोटा या बड़ा होना तथा आपस में मिलकर बड़ा रूप ले लेना।
  • चकत्तों का स्थान बदलते रहना।
  • दबाने पर चकत्ते का कुछ हल्का पड़ जाना।
  • होंठ, पलक, चेहरे या जीभ में सूजन होना, जो एंजियोएडेमा का लक्षण हो सकता है।
  • कुछ लोगों में गर्मी, पसीना या ठंड के संपर्क से लक्षण बढ़ना।

कारण:

अर्टिकेरिया में शरीर की कोशिकाओं से हिस्टामिन और अन्य रसायन निकलने के कारण त्वचा में सूजन होती है। इसके संभावित कारणों में शामिल हैं—

  • कुछ खाद्य पदार्थों से एलर्जी।
  • दवाओं से प्रतिक्रिया।
  • कीड़े के काटने या डंक से प्रतिक्रिया।
  • संक्रमण, विशेषकर वायरल संक्रमण।
  • गर्मी, पसीना या ठंड।
  • धूप या पानी जैसे कुछ भौतिक कारक।
  • त्वचा पर दबाव या रगड़ पड़ना।
  • तनाव, जो कुछ लोगों में लक्षण बढ़ा सकता है।
  • कई मामलों में कोई स्पष्ट कारण भी नहीं मिलता।

प्रकार:

(क) तीव्र अर्टिकेरिया:
6 सप्ताह से कम समय तक रहने वाली पित्ती की अवस्था।

(ख) दीर्घकालिक/क्रॉनिक अर्टिकेरिया:
6 सप्ताह या उससे अधिक समय तक बार-बार होने वाली पित्ती।

(ग) प्रेरित/भौतिक अर्टिकेरिया:
ठंड, गर्मी, दबाव, व्यायाम/पसीना, धूप आदि विशेष परिस्थितियों से उत्पन्न होने वाली पित्ती।

कौन-कौन सी जांच होती हैं?

अधिकांश साधारण अर्टिकेरिया का निदान लक्षणों और त्वचा की चिकित्सकीय जांच से ही हो जाता है। हर मरीज में बहुत सारी एलर्जी जांच आवश्यक नहीं होती। हालांकि, समस्या लंबे समय तक बनी रहने या बार-बार होने की स्थिति में डॉक्टर परिस्थिति के अनुसार कुछ जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं।

संभावित जांचों में—

  • CBC
  • ESR
  • आवश्यकता होने पर थायरॉयड की जांच।
  • संदिग्ध एलर्जी के लिए उपयुक्त जांच।
  • अन्य जांचें, यदि इतिहास या लक्षण किसी विशेष बीमारी की ओर संकेत करें।

बिना उचित चिकित्सकीय इतिहास के फूड एलर्जी की जांच कराने से गलत पॉजिटिव परिणाम आ सकते हैं। इसलिए ऐसी जांच डॉक्टर की सलाह से ही कराना बेहतर है।

सावधानी और बचाव:

  • जिस चीज से बार-बार पित्ती होती हो, उसका रिकॉर्ड रखें और डॉक्टर की सलाह से उससे बचें।
  • बहुत गर्म पानी से न नहाएं।
  • ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  • त्वचा को जोर से खुजलाने या रगड़ने से बचें।
  • यदि गर्मी और पसीने से समस्या बढ़ती है तो इनसे बचने का प्रयास करें।
  • डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं और सप्लीमेंट्स की जानकारी दें।
  • बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार एलर्जी की दवा बदलना या लंबे समय तक लेना उचित नहीं है।

होम्योपैथिक उपचार:

अर्टिकेरिया के लिए होम्योपैथी में विभिन्न दवाओं का उल्लेख मिलता है और होम्योपैथिक चिकित्सक लक्षणों के आधार पर उपचार का चयन कर सकते हैं। हालांकि, विशेष रूप से क्रॉनिक अर्टिकेरिया में उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन और प्रमाणित आधुनिक उपचार महत्वपूर्ण है।

ऐपीस, अर्टिका यूरेन्स, बेलाडोना, रस टॉक्स, सल्फर आदि का होम्योपैथिक साहित्य में उल्लेख मिलता है, लेकिन किसी व्यक्ति के लिए इनमें से कोई दवा, उसकी पावर या डोज स्वयं तय करना उचित नहीं है। किसी भी उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

⚠️ कब तुरंत चिकित्सा सहायता लें?

यदि पित्ती के साथ—

  • सांस लेने में कठिनाई हो रही हो।
  • गले या जीभ में तेजी से सूजन बढ़ रही हो।
  • निगलने में परेशानी हो रही हो।
  • चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस हो रहा हो।
  • अचानक बहुत कमजोरी महसूस हो रही हो।

तो यह गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

महत्वपूर्ण:

यदि पित्ती बार-बार हो रही है, 6 सप्ताह से अधिक समय से बनी हुई है, या हर बार किसी विशेष भोजन या दवा के बाद होती है, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ या एलर्जी विशेषज्ञ से चिकित्सकीय जांच और सलाह लेना उचित है।

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