
ल्यूकोरिया या श्वेत प्रदर महिलाओं में योनि से होने वाले सफेद या पारदर्शी स्राव को कहा जाता है। थोड़ी मात्रा में साफ या सफेद, बिना दुर्गंध वाला स्राव कई बार सामान्य होता है, विशेषकर मासिक धर्म चक्र के अलग-अलग चरणों में। इसलिए हर प्रकार का सफेद स्राव बीमारी का संकेत नहीं होता।
हालांकि, यदि स्राव की मात्रा अचानक बढ़ जाए या उसके साथ दुर्गंध, खुजली, जलन, दर्द अथवा अन्य लक्षण दिखाई दें, तो इसके पीछे संक्रमण या कोई अन्य स्त्री-रोग संबंधी कारण हो सकता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
प्रमुख लक्षण:
असामान्य योनि स्राव के साथ इनमें से एक या अधिक लक्षण हो सकते हैं—
- सफेद, पीला, हरा या अन्य असामान्य रंग का स्राव।
- स्राव की मात्रा सामान्य से अधिक होना।
- तेज दुर्गंध या मछली जैसी गंध आना।
- योनि में खुजली, जलन या लालिमा।
- पेशाब करते समय जलन या दर्द।
- संभोग के दौरान दर्द या असहजता।
- पेट के निचले हिस्से या पेल्विक क्षेत्र में दर्द।
- संक्रमण की स्थिति में कभी-कभी बुखार भी हो सकता है।
ल्यूकोरिया होने के संभावित कारण:
- सामान्य योनि स्राव — हार्मोनल बदलावों के कारण सामान्य सफेद या पारदर्शी स्राव हो सकता है।
- फंगल संक्रमण — अक्सर गाढ़ा सफेद स्राव और तेज खुजली देखने को मिल सकती है।
- बैक्टीरियल वैजिनोसिस — आमतौर पर पतला सफेद/धूसर स्राव और विशिष्ट दुर्गंध हो सकती है।
- यौन संचारित संक्रमण (STI) — जैसे ट्राइकोमोनिएसिस, गोनोरिया आदि।
- गर्भावस्था या हार्मोनल परिवर्तन।
- गर्भाशय या गर्भाशय ग्रीवा से संबंधित सूजन/संक्रमण अथवा अन्य स्त्री-रोग।
सामान्य और असामान्य स्राव में अंतर:
सामान्य स्राव:
हल्का सफेद या पारदर्शी, बिना तेज दुर्गंध और बिना खुजली, जलन या दर्द के स्राव अक्सर सामान्य हो सकता है और सामान्यतः किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती।
असामान्य स्राव:
यदि स्राव अत्यधिक मात्रा में हो, दुर्गंधयुक्त हो, उसका रंग असामान्य हो या उसके साथ खुजली, जलन, दर्द अथवा पेशाब में जलन हो, तो कारण की जांच कर उचित उपचार कराना जरूरी है।
सावधानी और बचाव:
- बाहरी जननांग क्षेत्र को साफ और सूखा रखें।
- लंबे समय तक गीले कपड़े न पहनें और बहुत अधिक कसे हुए कपड़ों से बचें।
- बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या योनि में कोई दवा/रसायन न डालें।
- योनि की अंदरूनी सफाई (डूशिंग) बिना चिकित्सकीय सलाह के न करें, क्योंकि इससे प्राकृतिक बैक्टीरियल संतुलन प्रभावित हो सकता है।
- समस्या बार-बार होने पर चिकित्सक की सलाह से मधुमेह जैसी स्थितियों की जांच कराई जा सकती है।
होम्योपैथिक दवाओं के संबंध में:
होम्योपैथी में बोरेक्स, सीपिया, पल्सेटिला, क्रियोजोट, नेट्रम म्यूर और कैल्केरिया कार्ब जैसी विभिन्न दवाओं का उल्लेख किया जाता है, लेकिन केवल “सफेद पानी” के आधार पर किसी विशेष दवा का चयन करना उचित नहीं है।
यदि स्राव का कारण फंगल, बैक्टीरियल या यौन संचारित संक्रमण है, तो उसका उचित और वैज्ञानिक उपचार जरूरी है। संक्रमण के इलाज के लिए होम्योपैथी को प्रभावी मानने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसलिए संक्रमण के लक्षण होने पर योग्य स्त्रीरोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर है।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
यदि—
- स्राव में तेज दुर्गंध हो।
- स्राव पीला/हरा या अन्य असामान्य रंग का हो।
- स्राव में खून आए।
- तेज पेट या पेल्विक दर्द हो।
- बुखार आए।
- पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द हो।
- संभोग के दौरान दर्द हो।
- समस्या बार-बार हो।
तो स्त्रीरोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार चिकित्सक योनि परीक्षण, संक्रमण की जांच या अन्य आवश्यक परीक्षण करा सकते हैं।
ध्यान रखें:
सफेद स्राव अपने-आप में हमेशा बीमारी नहीं होता। उपचार का निर्णय उसके रंग, गंध, मात्रा, साथ मौजूद लक्षणों और वास्तविक कारण के आधार पर होना चाहिए।


