जयपुर | शाबाश इंडिया

जयपुर के प्रताप नगर सेक्टर-8 स्थित शांतिनाथ जिनालय में विराजमान आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर जी महामुनिराज के सान्निध्य में धर्म प्रभावना के विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति के बीच आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री ने जीवन में सात्विकता, संयम और भोजन की शुद्धता के महत्व पर प्रेरक उद्बोधन दिया।
इस अवसर पर जैन महासभा के प्रतिनिधि राजाबाबू गोधा, समाजसेवी एवं देव-शास्त्र-गुरु के परम भक्त अनिल कुमार जैन, उषा जैन, नितिन जैन, विपिन जैन पांड्या सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। अनिल कुमार जैन पांड्या के 65वें जन्मदिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं ने जल, दूध, केसर एवं विभिन्न पवित्र द्रव्यों से आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन कर श्रीफल अर्पित किया तथा उनका मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इसके पश्चात जिनवाणी भेंट कर आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य भगवन कुंदकुंद स्वामी के अनुसार मनुष्य को सदैव प्रसन्न एवं शांत मन से भोजन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्रोध, तनाव, कलुषित मन, रूठे हुए भाव या मानसिक अशांति की स्थिति में किया गया भोजन शरीर और मन दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है तथा परिवार में तनाव और अशांति का कारण बन सकता है। इसके विपरीत प्रसन्न मन से किया गया भोजन ऊर्जा, आनंद और सकारात्मकता प्रदान करता है। उन्होंने अन्न का सम्मान करने, जूठन नहीं छोड़ने और भोजन को श्रद्धा के साथ ग्रहण करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जीतू जैन निमोड़िया के मंगलाचरण से हुआ तथा उन्होंने ही मंच संचालन भी किया।
इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मचंद जैन पराना, मंत्री महेश सेठी, अनिल कुमार पांड्या, चेतन निमोड़िया, चंद्रप्रकाश आवां वाले, जीतू जैन गंगवाल, पारस बाकलीवाल, पूर्ण गंगवाल, अतुल मंगल, पिंटू जैन, नितिन पांड्या, बाबूलाल, प्रकाश गंगवाल सहित सकल जैन समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।


