जयपुर। जटिल गर्भावस्था के मामलों में सटीक डायग्नोसिस और विशेषज्ञ की राय कितनी निर्णायक हो सकती है, इसका एक उदाहरण राजधानी के ‘सुखद डायग्नोस्टिक लैब’ में देखने को मिला। यहाँ एक गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु में पूर्व में बताई गई विसंगतियों को न केवल सुधारा गया, बल्कि आधुनिक फीटल मेडिसिन तकनीक से दुर्लभ शारीरिक असामान्यताओं की सटीक पहचान की गई।
गलत रिपोर्ट से उपजी थी चिंता
पीड़ित दंपति ने बताया कि इससे पहले अन्यत्र कराई गई जांच में उन्हें डरा दिया गया था कि शिशु का मल द्वार (Anus) नहीं बना है और श्वसन नली में गंभीर समस्या है, जिसके कारण एम्नियोटिक फ्लूइड (गर्भ का पानी) असामान्य रूप से बढ़ गया है। इस रिपोर्ट से तनावग्रस्त दंपति ने सुखद डायग्नोस्टिक लैब में फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ मेजर डॉ. आशीष चौधरी से परामर्श लिया।
विशेषज्ञ जांच में सामने आई दुर्लभ स्थितियां
डॉ. चौधरी द्वारा की गई विस्तृत सोनोग्राफी में पिछली रिपोर्ट के दावे गलत पाए गए। जांच में स्पष्ट हुआ कि शिशु का मल द्वार पूरी तरह विकसित था। हालांकि, डॉ. चौधरी ने अन्य सूक्ष्म विसंगतियों को पकड़ा:
क्लेंच्ड हैंड: भ्रूण में क्लेंच्ड हैंड (clenched hand) के साथ इंडेक्स फिंगर का मिडिल फिंगर पर ओवरलैप देखा गया और लिटिल फिंगर का रिंग फिंगर पर ओवरलैप देखा गया।।
असामान्य बाल: शिशु के चेहरे पर सामान्य से अधिक बाल (Excessive Hair) पाए गए।
संरचनात्मक दोष: हाथों की बनावट में अन्य विसंगतियां भी दर्ज की गईं।
सटीक साबित हुई डायग्नोसिस
विशेषज्ञ की सलाह और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दंपति ने चिकित्सकीय गर्भपात (Medical Abortion) का निर्णय लिया। प्रक्रिया के बाद जब शिशु की शारीरिक स्थिति देखी गई, तो वह शत-प्रतिशत डॉ. चौधरी की रिपोर्ट के अनुरूप पाई गई। शिशु का मल द्वार सामान्य था, लेकिन उंगलियां जुड़ी हुई थीं और चेहरे पर अत्यधिक बाल मौजूद थे।
“जटिल गर्भावस्था में केवल सोनोग्राफी मशीन का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ‘फेटल मेडिसिन’ विशेषज्ञ का अनुभव सबसे महत्वपूर्ण है। सही डायग्नोसिस ही दंपति को भविष्य के लिए सही निर्णय लेने का आधार प्रदान करती है।”
— डॉ. आशीष चौधरी, फेटल मेडिसिन विशेषज्ञ
आगे की जांच जारी
मामले की गहराई तक जाने के लिए सैंपल उच्च स्तरीय जेनेटिक परीक्षण हेतु भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि ये विसंगतियां किस विशिष्ट जीन संबंधी विकार या सिंड्रोम के कारण थीं। यह मामला एक बार फिर यह सिद्ध करता है कि भ्रूण की असामान्यताओं के मामले में दूसरी राय (Second Opinion) और विशेषज्ञ परामर्श जीवन बदल देने वाला साबित हो सकता है।


