Thursday, March 5, 2026

भीलवाड़ा में ‘मिनी महाकुंभ’: धर्मसत्ता और राजसत्ता के संगम के बीच तीन युवाओं ने ली संत दीक्षा

भीलवाड़ा, 26 फरवरी: धर्मनगरी भीलवाड़ा के इतिहास में गुरुवार, 26 फरवरी का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। हरि शेवा उदासीन आश्रम में आयोजित ‘सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह’ ने उस समय एक ‘मिनी महाकुंभ’ का रूप ले लिया, जब देश भर के प्रख्यात महामंडलेश्वरों और संतों की उपस्थिति के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस ऐतिहासिक उत्सव के साक्षी बने।

तीन नए संतों का उदय: सन्यास मार्ग पर बढ़े कदम

समारोह का मुख्य आकर्षण तीन ब्रह्मचारियों—इन्द्रदेव, कुनाल और सिद्धार्थ की उदासीन अखाड़े के सनातनी संत दीक्षा रही। दीक्षा के पश्चात इनके नए सन्यासी नाम क्रमशः ईशानराम उदासीन, केशवराम उदासीन और सुयज्ञराम उदासीन घोषित किए गए। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज जब इन नव-दीक्षित संतों को भगवा वस्त्रों में मंच पर लेकर आए, तो पूरा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। स्वामी हंसराम ने घोषणा की कि अब इनका गृहस्थ जीवन से संबंध समाप्त हो गया है और सनातन की सेवा ही इनका एकमात्र धर्म होगा।

पीएम मोदी के नेतृत्व में सनातन का पुनरुत्थान: डॉ. मोहन यादव

मुख्य अतिथि डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि आज पूरे विश्व में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के भाव के साथ सनातन संस्कृति का गौरव पुनर्स्थापित हो रहा है। उन्होंने अयोध्या और काशी का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया कि— “बहुत जल्द मथुरा में कन्हैया भी मुस्कुराएंगे।” डॉ. यादव ने सभी सनातनियों को वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले ‘सिंहस्थ महाकुंभ’ के लिए आमंत्रित भी किया।

धर्मसत्ता का मार्गदर्शन और संतों का जमावड़ा

समारोह की अध्यक्षता कर रहे उदासीन कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी गुरुशरणानंद महाराज (रमणरेती) ने कहा कि संत समाज के अंधकार को मिटाने वाले आध्यात्मिक दीपक होते हैं। वहीं, राज्यसभा सदस्य बालयोगी उमेशनाथ महाराज, राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम दक और सांसद दामोदर अग्रवाल ने भी सनातन की रक्षा और मजबूती पर बल दिया। समारोह में देश भर से आए दर्जनों महामंडलेश्वरों और भीलवाड़ा के स्थानीय संतों ने नव-दीक्षित शिष्यों को आशीर्वाद प्रदान किया।

सेवा और समरसता की मिसाल

स्वामी हंसराम महाराज ने बताया कि यह आयोजन ‘सर्व सनातन’ भाव से किया गया, जिसका ध्येय ‘एक संगत, एक पंगत’ रहा।

  • समष्टि भंडारा: अग्रवाल उत्सव भवन में आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर महाप्रसाद पाया।
  • त्याग का आदर्श: जजमान से दक्षिणा के रूप में मात्र एक रुपया और श्रीफल स्वीकार कर त्याग की नई मिसाल पेश की गई।
  • रासलीला और फूलों की होली: आठ दिवसीय रासलीला का समापन भव्य फूलों की होली के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने फाल्गुन के गीतों पर जमकर नृत्य किया।

इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रगाढ़ किया, बल्कि भीलवाड़ा में सनातन एकता का एक नया इतिहास भी रच दिया।

Previous article
Next article
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar