Thursday, March 5, 2026

घातक है बुजुर्ग का अकेलापन

पदम चंद गांधी

आज बुजुर्ग अकेलेपन से झूझ रहे है। उनकी पीड़ा, उनकी भावना, उनके विचारों को कोई सुनने वाला नहीं है।आज संयुक्त परिवार इतिहास बन गए हैं। एकाकी परिवार भी अपने नित्य कार्यक्रमों, प्रोफेशन ,व्यापार एवं कार्य स्थलों के चलते हुए औपचारिक बन गए हैं। बच्चे अपने ट्यूशन, पढ़ाई , टीवी एवम मोबाइल में समय व्यतीत करने से बुजुर्ग अकेलापन महसूस करते हैं । इस उम्र में जीवनसाथी का बिछुड़ जाना भी अभिशाप से काम नहीं होता। समय के अंतिम पड़ाव में बुजुर्ग अपनी भावनाओं को, अपनी यादों को ,शेयर करना चाहते हैं लेकिन वे सभीअव्यक्त रह जाती है, जिससे केवल कुंठा एवं निराशा का ही जन्म होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 20 करोड लोग डिप्रेशन का शिकार है। जिसमें बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है, जिसका मूल कारण है अकेलापन। अकेलेपन के कारण मन में नकारात्मक भावों का उद्गम होता है, कार्य करने की इच्छा खत्म हो जाती है ,जिसके कारण घुटन और निराशा बढ़ती है । परिणाम स्वरुप कइ बुजुर्ग आत्महत्या तक कर लेते है।
हॉवर्ड बिजनेस रिव्यू रिपोर्ट के अनुसार अकेलापन चलते, व्यक्ति की आयु तेजी से घटती है । जितनी आयु दिन में 15 सिगरेट पीने से घटती है ,उतनी आयु अकेले रहने से घट जाती है। अकेला व्यक्ति भयभीत रहता है। वह सोचता है लोगों के मेरे बारे में नकारात्मक विचार है । इससे उसका आत्मविश्वास टूट जाता है । अकेलापन दूर करने के उपाय:-
1- अंतरवैयक्तिक संबंधो को सफल बनावे
शोध के अनुसार जीवन मे सफलता के लिए ज्ञान, कौशल ,डिग्री ,कला और कार्य के अनुभव का महत्व केवल 15% ही रहता है। जबकि 85% सफलता का कारण लोगों के साथ अंतरवैयक्तिक संबंध है। बुजुर्ग अपने संबंधों को चौपाल में चर्चा नुक्कड़ सभाओं में, प्रातः कालीन घूमने जाते समय, बच्चों के साथ खेलते समय मित्रौ से मिलते समय , लेखन कार्य ,बागवानी ,गीत, संगीत के समय या पारिवारिक रिश्तों के द्वारा अपने अंतर संबंधों की सफलता को सिद्ध कर सकते है ।
2- सोच में परिवर्तन लाएं –
अगताइज्म दर्शन के अनुसार बुजुर्ग अपनी सोच को सकारात्मक बनते हुए सरल बना कर सहजता से प्रस्तुत करें तथा यह सोच की जो हो रहा है बस श्रेष्ठ है,अच्छा है और जो होगा वह भी अच्छा होगा । ऐसी सोच एवं विचार के द्वारा वह अनावश्यक तनाव और स्ट्रेस से बच सकता है।
3 भावी पीढ़ी पर विश्वास करें-
आज बुजुर्ग संतान को योग्य होकर भी उन्हें योग्य नहीं मानती उन पर विश्वास नहीं करती। 70 वर्ष के बुजुर्गों को जमीन जायदाद, फिक्स्ड डिपॉजिट मकान संबंधी समस्याएं, और हिसाब किताब के उलझनो से मुक्त रहना चाहिए । लेकिन वे इन्ही मे व्यस्त रहते हैं। जिससे केवल तनाव ही उत्पन्न होता है उत्पन्न कर देते हैं मूल करने की भी संतानों पर विश्वास नहीं करते यह कार्य संतानों पर विश्वास करके उन्हें जिम्मेदारी का एहसास कर दिया जाए जिससे वह आपसे जुड़े रहेंगे उन्हें जिम्मेदारी का एहसास भी होगा और अकेलापन भी दूर होगा।
4- कामनाओं पर अंकुश लगाए
देखने में आता है वृद्धावस्था में कामनाये बढ़ जाती है । चाहे वे खाने पीने की हो , पर्यटन पर जाने की हो , सम्मान पाने की हो, या अधिक धन एकत्रित करने की हो, इन सभी कामनाओ से बुजुर्ग को मुक्त होना चाहिए । लेकिन वह होता नहीं है क्योंकि मन जवान और तन बूढा होता है। वह इसी असंतुलन में जीवन बसर करता है। इन सब से बचने के लिए स्वयं को स्वयं में सीमित कर संतुलित होना आवश्यक है।
5- मिनिस्ट्री ऑफ़ लोनलीनेस की स्थापना
आज विश्व में सबसे ज्यादा बुजुर्ग जापान मे रहते हैं जिसमे अधिकांश अकेलेपन की समस्या से जूझ रहे हैं। इसलिए वहां की सरकार ने अकेलेपन लड़ने का मंत्रालय स्थापित किया है जो बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करते हैं तथा समाज के मुख्य धारा से जोड़ते हैं। आने वाले समय में भारत में भी बुजुर्गों की यही स्थिति हो सकती है। समय रहते इस पर भी विचार करना आवश्यक है। जिससे बुजुर्ग अकेलेपन को दूर कर सके।
6- रोबोट से दोस्ती
ए आई के नए अनुसंधान से रोबोट बुजुर्गों के लिए अच्छे मित्र साबित हो सकते हैं । आज रिश्ते केवल औपचारिक रह गए हैं । संयुक्त परिवार किसी समय सामाजिक पुलिस का काम करते थे वह बिखर गए हैं। सीमित परिवार भी औपचारिक हो गए हैं अपने औपचारिक अपने बन कर रह गए है अर्थात विशेष आयोजन, प्रसंग, लाभ के काम के लिए ,या बुलाने पर एकत्रित होते हैं कुछ समय बाद बिखर जाते हैं । ऐसे में रोबोट एक अच्छा विकल्प सामने आ रहा है। जिससे अकेलेपन को दूर किया जा सकता है।
7- ह्यूमन लाइब्रेरी किसी समय शहरों में पब्लिक लाइब्रेरी चला करती थी वह इसलिए कि बुजुर्ग वहां जाकर कर पढ़ सके, ज्ञान अर्जन कर सके, संवाद कर सके, विचार विमर्श कर सके, और नए नए लोगों से मिल सके। लेकिन आज यह विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। इसलिए अकेलेपन को दूर करने के लिए डेनमार्क में हुमन लाइब्रेरी का प्रचलन बढ़ रहा है। वहां पर व्यक्ति आधा घंटे किराए पर मिलता है। जिससे वह अपनी मन की बात कर सकते हैं। इससे मन का वेंटिलेशन होता है ,मन हल्का होता है।
8- युवा क्वालिटी समय बुजुर्गों को देवें
आज युवाओं को समझना है कि बुजुर्ग बदल नहीं सकते । वे कुछ समय के लिए सामंजस्य बना सकते हैं । युवाओं को अपना क्वालिटी समय चाहे वह प्रतिदिन 10 मिनट ही क्यों ना हो, बुजुर्ग के साथ बिताए इससे बुजुर्गों का मानसिक बोझ हल्का होगा और प्रसन्नता व मुल्लास बढ़ेगा ।
9- टाइम बैंक का उपयोग
आज कुछ संस्थाएं टाइम बैंक बन चुकी है । जिसमें स्वेच्छा से लोग अपने समय का दान करते हैं । बैंक अपनी योजना बनाकर ऐसे बुजुर्ग, जो अकेले रहते हैं उनके पास भेजते हैं तथा उनकी सुख सुविधा एवं आवश्यक कार्य की जानकारी लेकर सहायक सिद्ध हो रहे हैं । इनका उपयोग अकेलेपन को दूर करने के लिए कारगर सिद्ध हो रहा है।

   इस प्रकार स्पष्ट है, बुजुर्ग जब अकेले नहीं रहेंगे , भावों एवं विचारों को एक दूसरे के बीच में शेयर करेंगे  तब वे स्वस्थ  रहेंगे, निरोगी ब नेंगे और दीर्घायु को प्राप्त करेंगे। उनके मन में उत्साह , उमंग एवं उल्लास जागृत होगा और जीवन जीने की चाहत भी बढ़ेगी ।

(यह लेखक के अपने स्वतंत्र विचार हैं ।लेखक आध्यात्मिक चिंतक व. साहित्यकार एवं से.नि. वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी है।)

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