डॉ. नयन प्रकाश गांधी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के मार्गदर्शन में शुरू हुआ ‘ज्ञान भारतम मिशन’ केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि एक ‘बौद्धिक महायज्ञ’ है। यह स्वर्णिम भारत की वह सुदृढ़ नींव है, जहाँ प्राचीन मेधा और आधुनिक नवाचार मिलकर ‘विकसित भारत 2047’ का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। भारत की वास्तविक आत्मा उसके ज्ञान-कोष में निहित है। सदियों से हमारे पूर्वजों ने जिन पांडुलिपियों में ब्रह्मांड के रहस्यों को सहेजा, वे आज इस मिशन के माध्यम से डिजिटल अवतार में वैश्विक पटल पर प्रस्तुत हो रही हैं।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राजस्थान का योगदान
राजस्थान की मरुधरा न केवल अदम्य साहस और बलिदान की साक्षी रही है, बल्कि यह सदियों से असीम ज्ञान और पांडुलिपियों का एक अक्षुण्ण महाकोष भी रही है। वर्तमान युग में भारत अपनी खोई हुई सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित कर ‘विश्व गुरु’ बनने की ओर अग्रसर है। इसी संकल्प को धरातल पर उतारते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा घोषित ‘ज्ञान भारतम मिशन’ प्रदेश के हस्तलिखित ज्ञान भंडार के लिए नई संजीवनी सिद्ध हो रहा है।
रणनीतिक ढांचा: तकनीक और परंपरा का संगम
₹491.66 करोड़ के राष्ट्रीय बजट के साथ संचालित यह मिशन तकनीक और परंपरा का एक अकल्पनीय संगम है। राजस्थान के पाँच प्रतिष्ठित केंद्रों को इस राष्ट्रव्यापी नेटवर्क में शामिल करना प्रदेश की समृद्ध परंपरा के प्रति एक बड़ा सम्मान है:
- जयपुर: राजस्थान संस्कृत अकादमी और विश्व गुरुदीप आश्रम शोध संस्थान (समूह केंद्र के रूप में)।
- जोधपुर: राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान (RORI)।
- बीकानेर: अभय जैन ग्रंथालय।
- पद्मश्री नारायण दास संस्थान, जयपुर।
तकनीकी सुरक्षा कवच: ताड़पत्र से डिजिटल क्लाउड तक
प्राचीन धरोहरों को भौतिक क्षति से बचाने के लिए इस मिशन में 400 से 600 डीपीआई (DPI) की उच्च क्षमता वाली स्कैनिंग और ‘कोल्ड लाइट’ (ठंडी रोशनी) वाले विशेष उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। जोधपुर और बीकानेर के भंडारों में छिपे अनमोल ज्ञान-रत्न अब एआई (AI) आधारित पोर्टल के माध्यम से पूरी दुनिया के लिए सुलभ हो रहे हैं। यह हमारे पूर्वजों के ज्ञान के प्रति कृतज्ञता और भविष्य की पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का सफल निर्वहन है।
प्रगति के आंकड़े: देश का नेतृत्व करता प्रदेश
राजस्थान के डिजिटलीकरण के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि प्रदेश अपनी प्राचीन मेधा को सहेजने में देश का नेतृत्व कर रहा है। अब तक राज्य में 5.5 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है:
- जयपुर केंद्र (3.2 लाख+): संस्कृत, ज्योतिष और आयुर्वेद के प्रामाणिक साक्ष्य।
- जोधपुर केंद्र (1.5 लाख+): डिंगल, पिंगल और प्राचीन मारवाड़ी साहित्य।
- बीकानेर केंद्र (80,000+): प्राचीन जैन आगम और सूक्ष्म चित्रकला (Miniature Art)।
निष्कर्ष: स्वर्णिम भारत की आधारशिला
‘ज्ञान भारतम मिशन’ के माध्यम से राजस्थान का प्राचीन ज्ञान अब डिजिटल युग की नई भाषा में पूरी दुनिया को प्रेरित करेगा। यह मिशन केवल डेटा का संचय नहीं, बल्कि ‘स्वर्णिम भारत’ के निर्माण में वह मील का पत्थर है, जहाँ तकनीक हमारी संस्कृति की ढाल बनकर उभरी है। राजस्थान अब केवल अपनी भौगोलिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने विशाल ‘डिजिटल ज्ञान-कोष’ के कारण भी विश्व के शैक्षिक मानचित्र पर प्रमुखता से उभर रहा है।
लेखक परिचय: डॉ. नयन प्रकाश गांधी (कोटा, राजस्थान) भारत सरकार के अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS), मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। सामाजिक विकास और सांस्कृतिक विषयों पर आपके आलेख राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित होते रहते हैं।


