यात्रा दल के वरिष्ठ यात्रियों ने भी 14,000 सीढ़ियों की पदयात्रा कर की धर्म-प्रभावना
जयपुर। जनकपुरी, ज्योतिनगर स्थित नेमीनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जयपुर से छह दिवसीय यात्रा पर गया 101 सदस्यीय यात्रा दल तारंगा और उमता की यात्रा करते हुए सिद्ध क्षेत्र गिरनार पहुँचा। यह वही पावन स्थल है जहाँ जैन धर्म के बाईसवें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया था। यात्री पदम जैन बिलाला ने बताया कि यात्रा दल ने तारंगा में तीन गणधरों सहित साढ़े तीन करोड़ मुनिराजों की मोक्षस्थली पर विराजमान मूलनायक तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ के अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया। साथ ही आचार्य वर्धमान सागर जी के संघ के तीन मुनिराजों एवं माताजी के दर्शन-लाभ भी लिए। यात्रा दल के सदस्य सुनील सेठी एवं कमलेश पाटनी के अनुसार, शुक्रवार 19 दिसंबर को श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ गिरनार पर्वत की पहली टोंक पर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में अभिषेक व दर्शन किए गए। इसके पश्चात राजुल गुफा के दर्शन करते हुए पाँचवीं टोंक पर स्थित भगवान नेमिनाथ के चरण-चिह्नों के दर्शन हेतु लगभग 9,000 सीढ़ियाँ चढ़कर पुण्यार्जन किया गया।
पदम जैन बिलाला ने बताया कि गिरनार पर्वत पर आधी दूरी तक वर्तमान में रोप-वे की सुविधा भी उपलब्ध है। इतिहासकारों के अनुसार यादववंशी तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ, जिन्हें अरिष्टनेमि भी कहा जाता है, श्रीकृष्ण के समकालीन माने जाते हैं।
इस 101 सदस्यीय यात्रा दल में 57 महिलाएँ एवं 44 पुरुष यात्री शामिल हैं। गिरनार दर्शन के पश्चात यात्रा दल पालीताना, घोघा आदि तीर्थ स्थलों के दर्शन हेतु प्रस्थान करेगा।


