नाचते-गाते भक्तों ने जय-जयकार के बीच प्रभु की अगवानी की
पापी को पाप करने की धर्म में छूट दी जाती है, पाप करते-करते वह फूल जाता है – राष्ट्र संत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज
कल से होगा असीम कालीन भक्तामर विधान – विजय धुर्रा
प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया एवं मुकेश भैया का किया गया सम्मान
अशोक नगर। नगर में गजरथ महोत्सव के सफल आयोजन के पश्चात आज प्रातःकाल की वेला में अयोध्या नगरी से रथों में विराजमान नव-प्रतिष्ठित प्रभु को तीर्थ चक्रवर्ती मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में विशाल एवं भव्य शोभायात्रा के साथ नगर के जिनालयों में विराजमान कराया गया। शोभायात्रा मंडी प्रांगण से प्रारंभ होकर सुभाषगंज मैदान पहुँची, जहाँ यह विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि धर्म में पापी को पाप करने की छूट दी जाती है। पाप करते-करते वह अहंकार से फूल जाता है। प्रकृति की व्यवस्था ऐसी है कि पापी अपने कर्मों के बंधन में स्वयं जकड़ता चला जाता है और अंततः कर्म ही उसे ऐसा दंड देते हैं कि उसे बचाने वाला कोई नहीं रहता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार गोच गाय के स्तन से चिपककर दूध नहीं बल्कि रक्त पीती है, उसी प्रकार खोटे कर्म करने वाले को प्रकृति स्वयं उकसाती है, ताकि उसे कठोर दंड दिया जा सके। अच्छाइयों में भी बुराई देखने वाले के लिए प्रकृति के पास दंड की पूरी व्यवस्था है। ये उद्गार उन्होंने सुभाषगंज मैदान में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
विश्व शांति महायज्ञ की सफलता में नगरवासियों का रहा सहयोग
जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि विश्व शांति महायज्ञ की सफलता से सम्पूर्ण जैन समाज हर्षित है। श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में नगर के सभी समाजों ने भरपूर सहभागिता निभाई और जैन समाज को हर प्रकार से सहयोग प्रदान किया। उन्होंने प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रशासन एवं शासन का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया एवं मुकेश भैया सहित अन्य प्रमुख पात्रों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह में जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेन्द्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, विजय धुर्रा, संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय के.टी., संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांश घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन, टींगूमिल महामंत्री मनोज भैसरवास सहित अनेक प्रमुख जन उपस्थित रहे।
मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि केवल नियमों को अपनाना ही सब कुछ नहीं है, उससे आगे बढ़कर आत्मिक शुद्धि का विचार आवश्यक है। पुण्य समस्त कालिमा को धो देता है। जब व्यक्ति पुण्य-पाप से ऊपर उठता है, तब वह साधना की अवस्था में पहुँचता है। साधना में किस्मत की आवश्यकता नहीं होती, किंतु जिन कारणों से कर्मों का बंध होता है, उन्हें समाप्त करना अत्यंत कठिन होता है। क्रोध और कषाय के कारण जीवन भर का संचित पुण्य भी समाप्त हो सकता है। संसार में रहते हुए यदि हम अच्छी और मंगलमय जिंदगी चाहते हैं, तो हमें मंगलाचरण करना होगा और जो स्वयं मंगलमय हो चुके हैं, उनके चरणों का वंदन करते रहना चाहिए।


